पाकिस्तानी नेता कश्मीर,एलओसी तनाव के मुद्दे पर शरीफ के साथ (लीड-2)

इस्लामाबाद, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने सोमवार को कहा कि ‘कश्मीरी स्वतंत्रता आंदोलन अब भारत की क्रूरता से दबने वाला नहीं है।’

इसके साथ ही पाकिस्तान के राजनीतिक नेतृत्व ने कश्मीर मुद्दे पर एकजुट रुख का इजहार किया है।

शरीफ ने उच्चस्तरीय सर्वदलीय बैठक में कहा, “आत्मनिर्णय के अधिकार के लिए कश्मीरियों का संघर्ष वैध और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के अनुसार है।”

शरीफ ने कहा, “कश्मीरी और पाकिस्तानी एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। दोनों अविभाज्य हैं। हम सभी अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर कश्मीरियों की दुर्दशा के मुद्दे को उजागर करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। हम राष्ट्र से जुड़े मुद्दों पर, खास तौर से कश्मीर के मामले में एकजुट हैं।”

बैठक की अध्यक्षता नवाज शरीफ ने की, जिसमें सुरक्षा हालात के साथ, कश्मीर के मुद्दे और ‘भारतीय सेना द्वारा नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी’ की चर्चा की गई।

विदेश सचिव एजाज अहमद चौधरी ने कहा, “पाकिस्तान शांति चाहता है। कश्मीर सहित सभी दूसरे द्विपक्षीय मुद्दों पर भारत के साथ चर्चा की जानी चाहिए।”

विदेश सचिव ने भारत द्वारा नियंत्रण रेखा के पार सर्जिकल स्ट्राइक के दावों से इनकार किया। उन्होंने 18 सितम्बर को कश्मीर के उड़ी में सेना के शिविर पर आतंकी हमले में पाकिस्तान की संलिप्तता के भारत के आरोप को भी खारिज किया। उड़ी पर हुए हमले में भारत के 19 जवान शहीद हो गए थे।

संसदीय नेताओं ने कहा कि पूरा राष्ट्र कश्मीर और भारत की ‘आक्रामकता’ के मुद्दे पर एकजुट है।

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने कहा, “सरकार से कई मुद्दों पर मतभेदों के बावजूद, हम प्रधानमंत्री के साथ हैं।”

पीपीपी ने शरीफ का समर्थन किया और पार्टी ने इस मुद्दे पर स्पष्ट राय रखी। जरदारी ने नेताओं से कहा कि दोनों देशों के बीच का मौजूदा तनाव भारत-पाकिस्तान रिश्तों में बड़ा बदलाव (टर्निग प्वाइंट) है। उन्होंने कहा कि कश्मीर का कोई सैन्य समाधान संभव नहीं है।

कश्मीर के हालात पर 15 जुलाई को कैबिनेट की एक विशेष बैठक में एक संयुक्त संसदीय सत्र बुलाने का फैसला लिया गया था। लेकिन, यह योजना सरकार और विपक्ष के बढ़ते तनाव के चलते छोड़ दी गई।

लेकिन, अब भारत से तनाव के बीच राजनीतिक दलों की तरफ से संयुक्त संसदीय सत्र बुलाने की आवाज उठ रही है।

उत्तरी कश्मीर के उड़ी कस्बे में भारतीय सेना के शिविर पर 18 सितंबर को हुए आतंकी हमले में भारत के 19 जवान शहीद हो गए थे। भारत ने उड़ी हमले के लिए पाकिस्तान के जैश-ए-मोहम्मद आतंकी समूह को जिम्मेदार ठहराया है। इस हमले के बाद भारत ने नियंत्रण रेखा के पार जाकर आतंकियों पर हमले किए जिससे पाकिस्तान ने इनकार किया है।

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