इस्लामाबाद, 21 दिसम्बर (आईएएनएस)। पाकिस्तान की आपराधिक न्याय प्रणाली बाल अधिकारों के हित में नहीं है। तीन साल के एक बच्चे के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद सोमवार को समाचार पत्र ‘द नेशन’ ने यह बात कही है।
समाचार पत्र में प्रकाशित एक संपादकीय ‘चिल्ड्रन ऑफ क्राइम’ के मुताबिक, आंतरिक मामलों के मंत्री चौधरी निसार अली खान ने शनिवार को दो पुलिस थानाध्यक्षों को बर्खास्त कर दिया।
इनमें से एक को एक तीन वर्षीय बच्चे के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए और दूसरे को सिविल सोसायटी के कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के संबंध में गलत सूचना देने के लिए बर्खास्त किया गया है।
संपादकीय के मुताबिक, “बाल अपराधी का यह मामला पुलिस तंत्र में चरम अशिक्षा और बर्बरता को दर्शाता है। आपराधिक न्याय प्रणाली बाल अधिकारों के अनुकूल नहीं है।”
संपादकीय में कहा गया है कि यह पहला मौका नहीं है, जब किसी नाबालिग के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज किया गया है।
समाचार पत्र ने लिखा है कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि पुलिसकर्मियों की सोच आम जनता की सोच से अलग नहीं है।
जुलाई 2014 में गुजरांवाला में एक भीड़ ने एक सात साल की लड़की और एक शिशु सहित अहमदी समुदाय की तीन महिलाओं को मार डाला था।
संपादकीय के मुताबिक, जो लोग धार्मिक फसादों के कारण बच्चों को मार सकते हैं, उनके लिए उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करना कोई बड़ी बात नहीं है।
समाचार पत्र ने लिखा है, “ऐसा प्रतीत होता है कि बच्चे कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। हमारा देश हिंसक है और बच्चे इसके नवीनतम शिकार हैं।”
संपादकीय में साथ ही यह भी कहा गया है, “इन मामलों की पहले कभी जांच नहीं की गई, इसलिए हमें लगता है कि बाल शोषण नई बात है, लेकिन आतंकवाद से लेकर पुलिस के हाथों, बंधुआ मजदूरी, जबरन विवाह और रूपांतरण, यौन और शारीरिक शोषण जैसे हर मामलों में बच्चों का शोषण किया जाता है।”
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