इस्लामाबाद, 15 जून (आईएएनएस)। पाकिस्तान ने बुधवार को अफगानिस्तान के राजदूत हजरत उमर जखिलवाल को तलब किया और अफगान बलों की गोलाबारी में सेना के मेजर की हुई मौत पर विरोध दर्ज कराया।
मेजर अली जवाद खान शनिवार को सीमापार से हुई गोलीबारी में घायल हो गए थे, जिनकी पेशावर के सेना अस्पताल में मंगलवार को मौत हो गई।
दोनों देशों की तरफ से गोलाबारी तब शुरू हुई थी, जब पाकिस्तान अपने तरफ के क्षेत्र में एक फाटक का निर्माण कर रहा था।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा, “विदेश सचिव सरताज अजीज अहमद चौधरी ने आज अफगानिस्तान के राजदूत हजरत उमर जखिलवाल को विदेश मंत्रालय में तलब किया और मेजर अली जवाद खान की शहादत पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। वह पाकिस्तानी सेना के अधिकारी थे, जो अफगानिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा अकारण किए गए गोलाबारी में तोरखम सीमा पर घायल हो गए थे।”
बयान में कहा गया है, “अफगानिस्तान सरकार को इस अकारण गोलाबारी को बंद करने के लिए तत्काल कदम उठाने की गुजारिश की गई है।”
विदेश सचिव ने अफगानिस्तान द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज किया, जिसमें कहा गया है कि पाकिस्तान द्वारा फाटक का निर्माण दोनों देशों के बीच समझौते और सहमति का उल्लंघन है।
बयान में कहा गया है कि यह काम पाकिस्तान अपनी सीमा की तरफ कर रहा है। पिछले महीने दोनों देशों के बीच हुई बैठक में इस बारे में सहमति बनी थी।
विदेश सचिव ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान सरकार अफगानिस्तान सरकार से साथ पूर्व समझौते के तहत अपनी सीमा पर फाटक का निर्माण इसलिए करा रही है, ताकि लोगों और वाहनों की आवाजाही को विनियमित किया जाए।
उन्होंने अफगानी बलों द्वारा की जा रही गोलाबारी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे फाटक का निर्माण प्रभावित हो रहा है, जो प्रभावी सीमा प्रबंधन के लिए किया जा रहा है।
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