इस्लामाबाद, 3 जुलाई (आईएएनएस)। पाकिस्तान के एक प्रमुख अखबार ने आतंकियों के खिलाफ पाकिस्तान से अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है। अखबार ने रविवार को इस बात पर आश्चर्य जताया कि क्या पाकिस्तान एक बार फिर ‘अच्छे और बुरे आतंकवादी’ में फर्क कर रहा है।
दैनिक अखबार डॉन ने अपने संपादकीय में यह सवाल उठाया है। अखबार ने लिखा है, “पाकिस्तान और इस क्षेत्र की सुरक्षा सभी देशों की उग्रवाद और आतंकवाद के सभी स्वरूपों के खिलाफ एक सुस्पष्ट नीति पर निर्भर करती है।”
अखबार का कहना है कि पाकिस्तान के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज की टिप्पणी ने भ्रम पैदा कर दिया है। अखबार ने उनसे तत्काल एवं प्रभावी स्पष्टीकरण देने की मांग की है।
संपादकीय में कहा गया है कि आतंकी गुटों के कथित ‘ब्लोबैक’ के डर का उल्लेख कर अजीज पाकिस्तानी सरजमीं पर हक्कानी नेटवर्क और अफगान तालिबान के शरण स्थलों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का बचाव करते नजर आते हैं।
अखबार ने लिखा है कि अजीज की बातों से ऐसा लगता है कि इस बारे में फैसला अभी लिया जाना है कि कुछ आतंकी गुटों के खिलाफ सरकार किस हद तक और किस पैमाने तक कार्रवाई करेगी।
संपादकीय में सवाल किया गया है, “क्या अजीज सरकार की उस स्पष्ट नीति से पीछे हट रहे हैं जिसमें कहा गया था कि अब ऐसी कोई नीति नहीं रहेगी जिसमें कथित रूप से अच्छे या बुरे तालिबान की बात कही गई है?”
संपादकीय में कहा गया है कि ऐसा करना भयानक एवं आश्चर्यजनक रूप से पीछे हटना होगा और यह बात इससे भी और गंभीर हो जाती है कि इसे पूरी तरह से लापरवाह ढंग से कहा गया है।
डॉन ने कहा कि पाकिस्तान की नीति सभी आतंकी गुटों को समस्या के रूप में मानने की थी और उन्हें अनिवार्य रूप से पूरी तरह समाप्त करके इस समस्या को हल करने की थी।
अखबार ने लिखा है कि पाकिस्तान के अफगान तालिबान को वार्ता की मेज पर बुलाने के वादे को कभी इसका कारण बनने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए कि वह आगे चलकर आतंकी गुटों के बीच अंतर करने का एक कारण बन जाए। जिस चीज से अफगानिस्तान को खतरा है निश्चित रूप से उससे पाकिस्तान को भी खतरा है।
भारत और अफगानिस्तान, दोनों पाकिस्तान पर आतंकी गुटों को भारत और अफगानिस्तान के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए आश्रय और प्रशिक्षण देने का आरोप लगाते हैं। पाकिस्तान इस आरोप से इनकार करता है।
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