लंदन, 2 दिसम्बर (आईएएनएस)। ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने पेट में मौजूद जीवाणुओं में 6,000 से अधिक एंटीबायोटिक प्रतिरोधी जीन की पहचान की है।
यूनिवर्सिटी ऑफ बमिर्ंघम में प्राध्यापक विलेम वैन शाइक ने कहा है, “पेट के अधिकांश जीवाणु मानव शरीर को बिना नुकसान पहुंचाए रहते हैं। लेकिन इसमें वे जीवाणु भी रहते हैं, जो संक्रमण पैदा कर सकते हैं।”
उन्होंने कहा, “दुर्भाग्यवश ये बैक्टीरिया एंटीबायोटिक्स के लिए तेजी से रुकावट बनते हैं और हमें इस विकास में योगदान देने वाली प्रक्रियाओं को समझने की जरूरत है।”
फ्रांस के इंस्टीट्यूट नेशनल डी ला रिसर्च एग्रोमोमीक (आईएनआरए) के शोधार्थियों की एक टीम ने इन जीवाणुओं में प्रतिरोधी जीन की पहचान करने के लिए एक नई विधि विकसित की, जिसके द्वारा टीम ने ज्ञात एंटीबायोटिक प्रतिरोधी एंजाइम्स की त्रि-आयामी संरचना की तुलना पेट के जीवाणुओं द्वारा उत्पादित प्रोटीन से की।
इसके बाद उन्होंने इस विधि को पेट के लाखों-करोड़ों जीन की सूची में सेट किया, जिससे 6,000 से अधिक एंटीबायोटिक प्रतिरोधी जीन की पहचान हुई, जो रोगजनक जीवाणु में पहले से पहचाने गए जीन से बहुत अलग थे।
शाइक ने कहा, “ऐसा प्रतीत होता है कि इनमें से अधिकतर जीन जीवाणु में मौजूद होते हैं, जो मानव शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। इसलिए ये मानव स्वास्थ्य के लिए तत्काल खतरा नहीं हो सकते हैं। लेकिन एंटीबायोटिक दवाओं के निरंतर उपयोग से ये प्रतिरोधी जीन रोगजनक जीवाणु में स्थानांतरित हो सकते हैं, जिससे संक्रमण के इलाज में एंटीबायोटिक्स की प्रभावकता कम हो जाती है।”
यह शोध ‘नेचर माइक्रोबायलॉजी’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
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