पोलैंड में दूसरा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया

वारसा, 19 जून (आईएएनएस)। पोलैंड में रविवार को दूसरे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की धूम रही। हजारों की संख्या में लोगों ने योग सत्रों में हिस्सा लिया।

वारसा, 19 जून (आईएएनएस)। पोलैंड में रविवार को दूसरे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की धूम रही। हजारों की संख्या में लोगों ने योग सत्रों में हिस्सा लिया।

पोलैंड में ऐसे लोगों की बड़ी संख्या है, जिनके लिए योग जीवन जीने का एक तरीका बन चुका है। योग दिवस पर योग कार्यक्रम केवल राजधानी वारसा तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि कई अन्य बड़े और छोटे शहरों में भी कार्यक्रम हुए।

बीते साल की ही तरह इस बार भी मुख्य आयोजन वारसा के विशाल और सुंदर पार्क पोल मोक्तोव्स्की में हुआ। यहां दिन भर हजारों लोग योग के विभिन्न आसनों का अभ्यास करते रहे।

इस मौके पर कुछ भारतीय रेस्त्रां ने अपने स्टाल लगाकर पोलिश लोगों तक भारतीय व्यजनों का स्वाद भी पहुंचाया।

भारतीय राजदूत अजय बिसारिया ने वारसा में सुबह 10 बजे से योग दिवस कार्यक्रम की कमान संभाली। योग के छात्र बिसारिया के साथ कई अन्य देशों के राजनयिकों ने भी योगाभ्यास किया।

बिसारिया ने इस मौके पर लोगों को संबोधित करते हुए योग को पोलैंड में लोगों से मिली स्वीकार्यता पर गहरी संतुष्टि का इजहार किया।

उन्होंने कहा, “योग को एक सार्वभौमिक परिघटना बनाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सर्वाधिक बड़ी उपलब्धियों में से एक है।”

संयुक्त राष्ट्र ने बीते साल 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता दी थी।

वारसा स्थित इंडो-पोलिश संस्कृति समिति के अध्यक्ष जानसुज क्राइजोव्स्की ने कहा, “योग किसी एक धर्म, जाति या पंथ तक सीमित नहीं है। इसकी एक सार्वभौमिक पहचान और पहुंच है।”

कार्यक्रम का समापन नतालिया जाइबिज और उनकी बहन पॉलिना के भारतीय नृत्यों से हुआ।

ऐसे ही कार्यक्रम पोलैंड के काराकोव, डांस्क, पोजनन, लोज और रोकलॉ जैसे शहरों में भी हुए। कुल मिलाकर 21 शहरों में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। 19 जून को ही इस दिवस को मनाने का कारण रविवार का दिन होना रहा।

एक अनुमान के मुताबिक पोलैंड में 900 योग स्कूल हैं। सिर्फ राजधानी वारसा में ही ऐसे 200 स्कूल हैं।

आयोजन के लिए भारतीय दूतावास ने अप्रैल से ही तैयारियां शुरू कर दी थीं। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद ने पोलैंड के योग शिक्षकों से समन्वय के लिए योग विशेषज्ञ कीर्ति गहलवात को पोलैंड भेजा था।

कीर्ति ने आईएएनएस से कहा, “मैं सोच भी नहीं सकती थी कि पोलैंड में मुझे इतनी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलेगी।”

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