अस्ताना, 8 जून (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की शिखर बैठक में भाग लेने के लिए गुरुवार को यहां पहुंचे। मोदी ने यहां कजाकिस्तान के राष्ट्रपति नूरसुल्तान नजरबायेव के साथ पहली द्विपक्षीय बैठक की।
भारत और पाकिस्तान को शुक्रवार को एससीओ में पूर्णकालिक सदस्यता दिए जाने की उम्मीद है। एससीओ में चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, तजाकिस्तान व उज्बेकिस्तान भी हैं। भारत साल 2005 से एससीओ में एक पर्यवेक्षक के तौर पर है।
प्रधानमंत्री ने यहां पहुंचने के तुंरत बाद नजरबायेव से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों के विस्तार के तरीकों पर चर्चा की।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने ट्वीट किया, “कजाकिस्तान के राष्ट्रपति नूरसुल्तान नजरबायेव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों को विस्तार देने के उपायों पर चर्चा की।”
मोदी शुक्रवार को सम्मेलन से इतर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक कर कर सकते हैं।
हालांकि, मोदी व पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बीच किसी बैठक की कोई चर्चा नहीं है। शरीफ भी बैठक में भाग लेने यहां पहुंचे हैं।
मोदी ने बुधवार को कहा था कि एससीओ की पूर्णकालिक सदस्यता से भारत को यूरेशिया क्षेत्र में संपर्क और आर्थिक व आतंकवाद विरोधी सहयोग में मददगार होगी।
मोदी ने कजाकिस्तान रवाना होने से पहले एक बयान में कहा था कि भारत के एससीओ के पूर्णकालिक सदस्य बनने से यह समूह 40 फीसदी मानवता और करीब 20 फीसदी वैश्विक जीडीपी का प्रतिनिधित्व करेगा।
उन्होंने कहा कि भारत ने बीते साल ताशकंद में एससीओ की पूर्णकालिक सदस्यता की प्रक्रिया शुरू की थी।
मोदी ने कहा कि भारत के एससीओ सदस्यों से लंबे समय से रिश्ते रहे हैं और वह इसे एससीओ के जरिए आपसी भलाई के लिए आगे बढ़ाने और अपने देश व लोगों के विकास के तौर पर देखता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हम साथ में नए मौकों के जरिए आपसी लाभ से साझा चुनौतियों को हल करने का साझा प्रयास करेंगे, जिससे हमारी पूरी क्षमता से यह हकीकत बन सकेंगे।”
विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (यूरेशिया) जी.वी. श्रीनिवास के अनुसार, भारत ने इस गुट का सदस्य बनने के लिए 38 दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए हैं।
श्रीनिवास ने कहा, “एससीओ में सहयोग के दो रास्ते हैं।”
श्रीनिवास ने कहा, “इसमें से एक व्यापार, अर्थव्यवस्था, संपर्क, ऊर्जा, परिवहन, बैंकिंग से संबंधित मुद्दे हैं। इसमें दूसरा मुद्दा निसंदेह आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई है।”
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