नई दिल्ली, 20 नवंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय राजधानी के बीचोबीच व्यस्ततम इलाके कनॉट प्लेस में रात के 10 बजे राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के ठीक बाहर पंजाब नेशनल बैंक का एटीएम बंद पड़ा है, गार्ड एक किनारे चैन से झपकियां लेते हुए बैठा है और नोटों की आस लगाए करीब दर्जनभर लोग बंद पड़े एटीएम के इर्द-गिर्द जुटे हुए हैं।
नई दिल्ली, 20 नवंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय राजधानी के बीचोबीच व्यस्ततम इलाके कनॉट प्लेस में रात के 10 बजे राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के ठीक बाहर पंजाब नेशनल बैंक का एटीएम बंद पड़ा है, गार्ड एक किनारे चैन से झपकियां लेते हुए बैठा है और नोटों की आस लगाए करीब दर्जनभर लोग बंद पड़े एटीएम के इर्द-गिर्द जुटे हुए हैं।
हल्की-हल्की ठंड पड़ रही है और आम दिनों में यह एटीएम सुनसान पड़ा रहता है, लेकिन नोटबंदी के बाद नकदी की समस्या ने आम आदमी को इस कदर हैरान-परेशान कर रखा है कि वे बंद एटीएम बूथों से भी आस लगाए कतारों में खड़े हैं। अपनी रातें काली करना नोटमंदों की मजबूरी बन गई है।
इसी भीड़ में खड़े अजय माथुर का कहना है, “दिन में लंबी कतार देख हिम्मत नहीं पड़ती, इसलिए मैं रात को एटीएम से पैसे निकालने के लिए यहां आया हूं। इस उम्मीद में खड़ा हूं कि अगर रात को कैशवैन आती है, तो पैसे निकाल पाऊंगा। मोदी जी ने फैसला तो सुना दिया, लेकिन नौकरी-पेशा इंसान कितने दिन कतार में खड़ा रहे।”
कालेधन पर लगाम कसने की दलील देकर केंद्र सरकार की ओर से की गई नोटबंदी का सकारात्मक असर भले ही 50 दिन बाद देखने को मिले, लेकिन आम आदमी को हर रोज जिन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, उसका हल कौन निकालेगा?
पैसों की किल्लत झेल रहे लोगों को कैशवैन का इंतजार है। आलम यह है कि वे बंद या खराब पड़े एटीएमों के बाहर भी आस लगाए कतारों में खड़े नजर आ रहे हैं। कई लोगों ने बताया कि यूं ही खड़े-खड़े पूरी रात गुजर जाती है।
कनॉट प्लेस पर बंद एटीएम के आगे खड़े एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “मोदी जी का फैसला गलत नहीं है, लेकिन उन्हें नोटबंदी से पहले देशवासियों को एक सप्ताह का समय देना चाहिए था। लोगों को जो समस्याएं अब हो रही हैं, शायद न होतीं।”
नोएडा के सेक्टर-16 मेट्रो स्टेशन से निकलकर एचडीएफसी बैंक के एटीएम के बाहर भी लंबी कतार लगी है। उन्हें भी कैशवैन के आने का इंतजार है। कतार में खड़े लोगों का कहना है कि इस एटीएम में पिछले चार दिन से पैसे नहीं आए हैं।
एक निजी कंपनी में काम करने वाले अमित भी कतार में खड़े हैं। उनका कहना है कि ऑफिस पास में ही है और वह रोज आधे घंटे का समय निकालकर इस एटीएम का एक चक्कर काट लेते हैं, यह देखने के लिए कि कभी तो इसमें पैसे आएंगे!
नोएडा सेक्टर-16 और मालवीय नगर मेट्रो स्टेशनों के परिसर में लगे एटीएम का आलम यह है कि कोई व्यक्ति जैसे ही एएटीएम बूथ के अंदर जाता है, पीछे लोगों की कतार लग जाती है और उस व्यक्ति के खाली हाथ बाहर आते ही सबके चेहरों पर उदासी छा जाती है।
नोटबंदी के दो हफ्ते बाद भी हालत जस की तस है। लोगों का धर्य टूटने लगा है, विरोध के स्वर उठने लगे हैं। इस बीच सरकार ने कई उपाय भी किए, फिर भी देश की जनता को राहत नहीं मिल रही है।
मालवीय नगर मेट्रो स्टेशन के अंदर भारतीय स्टेट बैंक के एटीएम के बाहर खड़े सुरक्षा गार्ड का कहना है, “एक समय ऐसा था, जब एटीएम में पैसे रहते थे और इक्का-दुक्का लोग ही नोट निकालने आते थे, लेकिन आज हालत यह है कि लोगों की कतार लंबी होती जा रही है, मगर एटीएम में नोट नहीं हैं।”
पंजाब नेशनल बैंक के एक कर्मचारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर कहा, “रकम कम मिलने के कारण लोगों को रोज-रोज कतार में लगना पड़ रहा है। कैश कम आ रहा है, इसलिए हमें कतारों में लगे लोगों को वापस जाने के लिए कहना पड़ता है। अब भीड़ हालांकि थोड़ी कम हुई है। धीर-धीरे और कम होगी।”
प्रगति मैदान में जारी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले पर भी नोटबंदी का असर साफ नजर आ रहा है। आयोजकों ने यहां नोटबंदी की परेशानी का हल निकालने की हर कोशिश की, लेकिन यहां के एटीएमों का हाल भी ऐसा ही है। काम कर रहे एटीएमों के बाहर लंबी कतारें हैं और बंद पड़े एटीएमों के बाहर भी लोग इस इंतजार में खड़े हैं कि एक दिन पैसे जरूर मिलेंगे और वह उनके लिए ‘अच्छा दिन’ होगा।
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