संयुक्त राष्ट्र, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र में दर्जा प्राप्त अधिकारी लक्ष्मी पुरी ने कहा कि बच्चों, बुजुर्गो तथा बीमारों की देखभाल को अथरेपार्जन का साधन बनाए जाने से विश्वभर में कम से कम एक अरब महिलाएं लाभान्वित हो सकती हैं।
संयुक्त राष्ट्र, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र में दर्जा प्राप्त अधिकारी लक्ष्मी पुरी ने कहा कि बच्चों, बुजुर्गो तथा बीमारों की देखभाल को अथरेपार्जन का साधन बनाए जाने से विश्वभर में कम से कम एक अरब महिलाएं लाभान्वित हो सकती हैं।
महिलाओं की स्थिति पर रिपोर्ट जारी करते हुए लक्ष्मी ने यहां संवाददाताओं से कहा, “अगर गुणवत्तापूर्ण सेवा के कार्यो में निवेश किया जाए, जो कुछ देशों में होता है, तो यह देखभाल की जरूरत को पूरा करेगा, बिना भुगतान के भार को कम करेगा और रोजगार सृजन का इंजन बनेगा तथा एक अरब महिलाओं को सशक्त बनाएगा।”
रिपोर्ट के अनुसार, “महिलाओं पर अभी भी बिना भुगतान वाले काम का भार है।”
पूर्व भारतीय राजनयिक और संयुक्त राष्ट्र, महिला में सहायक महासचिव तथा उप अधिशासी निदेशक पुरी ने कहा, “हम सिर्फ नए आर्थिक एजेंडे और बदलाव की मांग कर रहे हैं।”
संयुक्त राष्ट्र, महिला लैंगिक समानता और महिलाओंके सशक्तीकरण के लिए काम करता है।
उन्होंने कहा कि भुगतान और गैर भुगतान वाले काम को भुगतान वाले काम में समान पहुंच, सामाजिक सुरक्षा वाले सम्मानजनक कार्य, निष्पक्ष तथा उचित कमाई और गैर भुगतान वाले काम में साझेदारी में तब्दील कर देना चाहिए।
यह बातें ‘प्रोग्रेस आफ द वल्र्डस वुमन, 2015-16 : ट्रांसफोर्मेसन इकोनोमिज, रियलाइजिंग राइट्स’ रिपोर्ट से सामने आई हैं।
रिपोर्ट की कुछ खास बातें :
-भारत में भुगतान वाले काम में महिलाओं की साझेदारी का प्रतिशत 1990 से 2013 34.8 फीसदी से 27 फीसदी हो गई। यह देश में तेजी से हुए आर्थिक विकास दौरान हुआ है।
-भारत में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के वेतन में अंतर विश्वभर के औसतन 23.5 फीसदी के मुकाबले 32.6 फीसदी है।
-भारत के गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी योजना में 50 फीसदी हिस्सेदारी महिलाओं की है।
-विश्वभर में घरेलू काम में 83 फीसदी महिलाएं शामिल हैं, जबकि आधे से अधिक को न्यूनतम मजदूरी नहीं दी जाती।
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