बिहार चुनाव 2025: बिहार में महागठबंधन का ‘अति पिछड़ा’ दांव: SC-ST जैसा कानून और 30% आरक्षण का वादा

पटना-बिहार में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, इसको लेकर राज्य में चुनावी हलचल तेज हो गई है और सड़क से लेकर पार्टियों की रैलियों के स्टेज तक माहौल गरमाया हुआ है. इसी बीच बिहार चुनाव के लिए महागठबंधन का घोषणा पत्र आना शुरू हो गया है, जिसने चुनावी चर्चा में एक नया मोड़ ला दिया है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राष्ट्रीय जनता दल नेता तेजस्वी यादव ने बुधवार को पटना में महागठबंधन के मैनिफेस्टो का पहला भाग का ऐलान किया.

महागठबंधन ने अपने घोषणा पत्र में अति पिछड़ा वर्ग को लेकर बड़े वादे किए हैं और इसे अति पिछड़ा न्याय संकल्प नाम दिया गया है. महागठबंधन ने वादा किया है कि पंचायत और निकायों में ईबीसी को 30 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा और एससी-एसटी की तरह अति पिछड़ा अत्याचार निवारण कानून बनाया जाएगा. महागठबंधन का घोषणा पत्र इस चुनावी हलचल में और गर्मी पैदा कर सकता है. क्योंकि बिहार जाति आधारित सर्वेक्षण 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 36.01% अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) है, जोकि बिहार की आबादी का सबसे बड़ा वर्ग है. मैनिफैस्टो में किए गए वादों के देखकर साफ मालूम चलता है कि महागठबंधन अति पिछड़े वर्ग को अपनी ओर लुभाने की पूरी कोशिश में लगी हुई है.

अति पिछड़ा न्याय संकल्प पत्र में महागठबंधन ने किए 10 वादे-
एससी-एसटी की तर्ज पर अति पिछड़ा अत्याचार निवारण कानून बनाया जाएगा.

अति पिछड़ा वर्ग के लिए पंचायत और नगर निकायों में 20 प्रतिशत आरक्षण को बढ़ाकर 30 फीसदी किया जाएगा.

आबादी के अनुपात में आरक्षण की 50 प्रतिशत की सीमा को बढ़ाने के लिए विधानमंडल से पारित कानून को संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल करने के लिए केंद्र सरकार को भेजा जाएगा.

नियुक्ति चयन प्रक्रिया में ‘कोई योग्य नहीं मिला’ यानी Not Found Suitable (NFS) को अवैध घोषित किया जाएगा.

आवासीय भूमिहीनों को शहरी क्षेत्र में 3 डिसिमल और ग्रामीण क्षेत्र में 5 डिसिमल जमीन दी जाएगी.

यूपीए सरकार के बनाए शिक्षा के अधिकार कानून 2010 के तहत प्राइवेट स्कूलों में नामांकन के लिए आरक्षित सीटों का आधा हिस्सा ईबीसी, ओबीसी, एससी और एसटी के बच्चों को मिलेगा.

25 करोड़ रुपये तक के सरकारी ठेकों और आपूर्ति के टेंडर में EBC, OBC, SC, ST के लिए 50 परसेंट आरक्षण का प्रावधान किया जाएगा.

संविधान की धारा 15(5) के अंतर्गत राज्य के सभी निजी शिक्षण संस्थानों के नामांकन हेतु आरक्षण लागू किया जाएगा.

आरक्षण की देखरेख के लिए उच्चाधिकार प्राप्त आरक्षण नियामक प्राधिकरण का गठन होगा.

जातियों की सूची में कोई भी बदलाव केवल विधानमंडल से ही होगा.

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