देश के पहले उपराष्ट्रपति गैस्टन सिंडिमिवो ने इसका कारण आईसीसी द्वारा अश्वेत लोगों के अधिकारों का उल्लंघन बताया है।
सिंडिमिवो ने कहा कि बुरुं डी की सरकार ने समीक्षा के लिए आईसीसी के रोम कानून को बुरुं डी के अलग होने से संबंधित विधेयक भेज दिया है।
सिंडमिवो के अनुसार, “आईसीसी की योजना अश्वेत लोगों के अधिकारों का उल्लंघन करना है। हम यह निर्णय ले रहे हैं, ताकि अन्य देश हमारा अनुसरण करें, क्योंकि उपनिवेशवादियों द्वारा किया जा रहा यह अन्याय असहनीय है।”
बुरुं डी की सरकार का यह निर्णय ऐसे समय में आया है, जब संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने 30 सितंबर, 2016 को एक प्रस्ताव जारी किया था, जिसके तहत एक रपट में संयुक्त राष्ट्र के तीन स्वतंत्र विशेषज्ञों ने बुरुं डी में अप्रैल 2015 से जून 2016 के बीच ‘सकल और प्रचुर मात्रा में’ मानव अधिकारों के उल्लंघन की घटनाएं पाई थीं।
वहीं, बुरंडी की सरकार ने रपट को खारिज करते हुए कहा कि यह पक्षपातपूर्ण और गैरपेशेवर है।
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