चेन्नई, 10 मार्च (आईएएनएस)। देश के बैंकों द्वारा किंगफिशर एयरलाइंस के प्रमोटर विजय माल्या को ‘विलफुल डिफॉल्टर’ कहे जाने से काफी पहले शहर की एक कंपनी बेस्ट एंड क्रॉम्पटन इंजीनियरिंग के कर्मचारियों ने सार्वजनिक तौर पर माल्या को गैर निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) कहा था।
उन्होंने माल्या को कंपनी छोड़ने के लिए भी कहा था।
आम तौर पर कंपनी की सालाना आम बैठक (एजीएम) एक उबाऊ बैठक हुआ करती है, जिसमें शेयर धारक अपनी-अपनी विशेष मांग रखते हैं।
कभी-कभी ही हालांकि ऐसा होता है, जब शेयरधारकों की बैठक में एक व्यक्तिगत शेयरधारक कंपनी के मालिक से कठिन सवाल करता है।
बेस्ट एंड क्रॉम्पटन की 1990 के दशक में हुई वह एजीएम ऐसी ही बैठक थी।
तब यह कंपनी माल्या के यूबी समूह का हिस्सा थी और मुनाफे में काम नहीं कर रही थी।
उस बैठक में कंपनी के कर्मचारियों और शेयरधारकों ने अपने अध्यक्ष माल्या को एनपीए कहते हुए उन्हें बोर्ड से त्यागपत्र देने के लिए कहा था।
उन लोगों ने माल्या के विरुद्ध नारे लिखी तख्तियां भी ली हुई थीं।
हालांकि माल्या ने उस बैठक को कुशलता से संभाल लिया था।
बैठक में माल्या ने मुस्कराते हुए कहा था कि वे बारी-बारी से बोलें, ताकि वह सभी को सुन सकें।
अनियंत्रित शोर-शराबे के कारण बैठक स्थगित कर दी गई थी। बाद में माल्या ने कंपनी को किसी इंडोनेशियाई समूह को बेच दी थी।
हिंदू बिजनेस लाइन के वरिष्ठ सहायक संपादक एम रमेश ने उस बैठक का स्मरण करते हुए कहा, “शेयरधारक काफी आक्रामक मुद्रा में थे। एक कर्मचारी ने शिकायत करते हुए कहा माल्या से कहा, ‘आपने समूह की कई कंपनियां बंद कर दी हैं। आपने कुछ नया शुरू नहीं किया’।”
रमेश ने कहा, “बैठक में जब माल्या किसी दूसरे बोर्ड सदस्य से बात करने लगे, तो एक शेयरधारक ने क्रोध में माल्या से कहा कि वह उन्हें (शेयरधारक को) सुनें, न कि किसी और से बात करें। इस पर माल्या ने शांति के साथ जवाब दिया, ‘मैं आपको सुन रहा हूं’ और उन्होंने शेयरधारक द्वारा उठाए गए सभी मुद्दे दोहरा दिए।”
dharmpath.com dharmpath