नई दिल्ली, 27 नवंबर (आईएएनएस)। सरकारी बैंकों की गैर निष्पादित परिसंपत्तियों या बुरे ऋण की समस्या पर विचार करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी।
वित्तीय सेवा विभाग के सचिव अंजुली चिब दुग्गल ने यहां संवाददाताओं से कहा, “सरकारी बैंकों के प्रमुखों के साथ वित्तमंत्री की हुई बैठक में समिति पर विचार किया गया। इसके विवरणों में जाना जल्दबाजी होगी, लेकिन निश्चित रूप से यह कुछ क्षेत्रों पर प्रमुखता से विचार करेगी।”
उन्होंने डिजिटल वित्तीय समावेशन केंद्र द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम से अलग कहा, “एनपीए चिंता का विषय है और सरकार इस विषय पर जागरूक है। सरकार इस्पात, एल्यूमीनियम और कपड़ा क्षेत्रों की समस्या पर भी विचार करेगी।”
सरकारी बैंकों का एनपीए जून 2015 के अंत तक 6.03 फीसदी हो गया था, जो मार्च 2015 में 5.20 फीसदी थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अक्टूबर में कहा था कि सरकार अगले पांच वर्षो में इन बैंकों में 70 हजार करोड़ रुपये डालेगी।
केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने मौजूदा वित्त वर्ष के बजट में इन बैंकों के पुर्नपूजीकरण के लिए 7,940 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
इसी आयोजन में वित्त राज्यमंत्री जयंत सिन्हा ने शुक्रवार को कहा, “एनपीए कई कारकों का परिणाम है। कोई ऐसी जादू की छड़ी नहीं, जो इस मुद्दे से निपट सके। हमें बहुआयामी तरीका अपनाना होगा।”
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