लंदन, 3 जुलाई (आईएएनएस)। ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा है कि ‘हमें ‘ब्रेक्सिट’ (यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के बाहर निकलने) पर अपने विकल्प खुले रखने चाहिए।’
ब्लेयर ने रविवार को बीबीसी को बताया कि ‘ब्रेक्सिट’ पर जनमत संग्रह में यूरोपीय संघ (ईयू) में बने रहने के लिए मतदान कर चुके 48 प्रतिशत लोग ‘खुद को मताधिकार से वंचित’ महसूस कर रहे हैं और यह स्पष्ट नहीं है कि ‘हम किस ओर बढ़ रहे हैं।’
उन्होंने कहा, “ब्रेक्सिट का देश पर क्या असर पड़ेगा, यह सामने आने के बाद अगर लोगों की इच्छा बदल जाती है तो हमें उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।”
प्रधानमंत्री डेविड कैमरन और लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कोर्बियन, दोनों ने दूसरे ईयू जनमत संग्रह से इनकार कर दिया है।
‘रेडियो 4’ के ‘द वर्ल्ड दिस वीकेंड’ कार्यक्रम में इस सवाल पर कि क्या ‘विकल्प खुले रखने’ का अर्थ दूसरा ईयू जनमत संग्रह है, ब्लेयर ने जवाब में कहा, “इसका अर्थ है कि हम जो भी फैसला लें..उसका अर्थ वही होना चाहिए जिस ओर इस बहस का रुख जाता हो।”
उन्होंने साथ ही कहा कि ईयू छोड़ने का मामला कमजोर पड़ गया है।
उन्होंने कहा कि देश में महत्वूपर्ण मतदान हुआ था, लेकिन डेविड कैमरा के इस्तीफे और नेतृत्व के लिए चुनाव का अर्थ यह है कि हमें राष्ट्र हित पर ध्यान केंद्रित करने की जगह कंजर्वेटिव पार्टी के सदस्यों से अपील करने पर ध्यान देना होगा।
उन्होंने इस मामले में प्रधानमंत्री डेविड कैमरन की भूमिका के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि अब सरकार को कंजर्वेटिव पार्टी के नेतृत्व की दौड़ के परिणाम का इंतजार करने के स्थान पर ईयू के अन्य देशों से बातचीत कर अन्य उपाय तलाशने चाहिए।
उन्होंने कहा, “अगर हम एक बार यूरोपीय संघ के अन्य देशों के नजरिए से भी देखें तो हमें समझौते का संभावित रास्ता मिल जाएगा। मेरा कहना है कि हम संप्रभू हैं। हमें अपने विकल्प खुले रखने चाहिए।”
उन्होंने साथ ही कहा कि ब्रिटेन के ईयू से अलग होने के व्यावहारिक प्रभाव स्पष्ट होने के बाद इस मसले में संसद की भी भूमिका होनी चाहिए।
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, “देश को इस बहस में शामिल रहने देना चाहिए और उसे अपने विचार रखते रहने देना चाहिए।”
उन्होंने कहा, “हां, फिलहाल यह स्पष्ट है कि हम जा रहे हैं। लेकिन हम नहीं जानते कि हम कहां जा रहे हैं।”
ब्लेयर ने कहा कि ब्रिटेन ने दुनिया में अपना स्थान नीचे कर दिया था और उसे अपने स्थान के लिए फिर से लड़ना होगा।
उन्होंने कहा, “मेरा कहना है कि जब तक दूसरी ओर कोई बड़ा लाभ न दिखाई दे रहा हो तो हमें यह क्यों करना चाहिए। कोई लाभ फिलहाल तो दिखाई नहीं दे रहा है।”
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