वाशिंगटन, 2 मार्च (आईएएनएस)। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था उबरने के रास्ते हैं और इसकी रफ्तार 2015-16 वित्त वर्ष में 7.3 फीसदी से बढ़कर 2016-17 में 7.5 फीसदी रहेगी।
आईएमएफ ने कहा कि औद्योगिक गतिविधियों में इजाफा होने और कारोबारियों का भरोसा बढ़ने से निजी निवेश में बढ़त की संभावना है।
इसमें कहा गया है कि 2014 में तेल की कीमतें गिरने से भारत में आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई है और चालू खाते का घाटा पाटने और वित्तीय घाटे को थामने में सफलता मिली है। इससे मुद्रास्फीति में तेज गिरावट आई है।
इसमें कहा गया है कि आपूर्ति में तेजी लाने (खासतौर से अनाजों के बफर स्टॉक को बाजार में उतारने) से मुद्रास्फीति कम हुई है, जो वित्त वर्ष 2011-13 में 9.5 फीसदी के स्तर पर था, दिसंबर 2015 में 5.6 के स्तर पर आ चुका है।
वहीं, इस रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्यात में गिरावट से भारतीय कारपोरेट कंपनियों की वित्तीय स्थिति कमजोर हुई है और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का बैलेंस शीट देश की अर्थव्यवस्था पर बोझ बन गया है।
इसमें कहा गया है कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र में निवेश बढ़ाकर आपूर्ति पक्ष की समस्याओं को दूर कर के कारपोरेट और सार्वजनिक बैंकों की बैलेंस सीट को दुरुस्त कर सकती है और इससे निजी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।
आईएमएफ के कार्यकारी निदेशक ने कहा कि वैश्विक वित्त बाजार की हालत खस्ताहाल है और बाजार में अनिश्चितता है, इसके कारण निर्यात से ज्यादा उम्मीद नहीं है। इससे भारत की विकास संभावनाओं पर असर पड़ेगा।
इससे निपटने के लिए कार्यकारी निदेशकों ने लगातार निरंतर सर्तकता, विकासोन्मुख राजकोषिय समेकन और सतत सुधार पर जोर देने पर बल दिया।
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