भारत कदम बढ़ाए, तो पाकिस्तान पीछे नहीं रहेगा : कसूरी (साक्षात्कार)

नई दिल्ली, 10 जनवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ ही पाकिस्तानी सेना ने भी पठानकोट हमले की निंदा की है, और अब पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद कसूरी ने कहा है कि पाकिस्तानी सेना भारत के साथ शांति के नए प्रयासों में शरीफ के साथ है और दोनों देशों के बीच मुद्दे सुलझाने के लिए एक गंभीर संवाद शुरू होना आवश्यक है।

नई दिल्ली, 10 जनवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ ही पाकिस्तानी सेना ने भी पठानकोट हमले की निंदा की है, और अब पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद कसूरी ने कहा है कि पाकिस्तानी सेना भारत के साथ शांति के नए प्रयासों में शरीफ के साथ है और दोनों देशों के बीच मुद्दे सुलझाने के लिए एक गंभीर संवाद शुरू होना आवश्यक है।

कसूरी ने आईएएनएस को ईमेल के माध्यम से दिए एक खास साक्षात्कार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पाकिस्तान यात्रा पर कहा, “मैं भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद का खुले दिल से स्वागत करता हूं। जो लोग भी शरीफ के जन्मदिन पर मोदी द्वारा बधाई दिए जाने के पीछे की मंशा के बारे में अटकलें लगा रहे हैं, मैं उनका ध्यान भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के भाषण पर दिलाना चाहूंगा, जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान के साथ युद्ध कोई हल नहीं है। साथ ही मैं कहना चाहूंगा कि यह पाकिस्तान के लिए भी कोई हल नहीं है।”

भारत के लोगों ने मोदी और शरीफ की मुलाकात पर सवाल उठाए हैं कि क्या इससे सीमा पर संघर्षो में कमी आएगी।

इस पर कसूरी ने कहा, “मुझे पूरी उम्मीद है कि इससे तनाव कम होगा। अगर ऐसा नहीं होता तो मुझे हैरानी होगी। हमारे कार्यकाल के दौरान किए गए प्रयासों का नतीजा था कि 2003 में नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम की अवधि बढ़ी जो कि लगभग 10 वर्षो तक कायम रही।”

कश्मीर पर चर्चा किए बिना मोदी और शरीफ की मुलाकात के औचित्य के सवाल पर कसूरी ने कहा, “किसी को भी भारत और पाकिस्तान के बीच असली मुद्दों के बारे में बात करने से डरना नहीं चाहिए। कश्मीरी आबादी का बड़ा हिस्सा वर्तमान स्थिति से खुश नहीं है। स्वर्गीय मुफ्ती मोहम्मद सईद, पीडीपी की महबूबा मुफ्ती और नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला जैसे नेताओं ने पाकिस्तान द्वारा जम्मू एवं कश्मीर की स्थिति हल किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया है।”

यह आतंकवादियों के हाथों से प्रचार का एक बड़ा हथियार छीन लेगा।

हुर्रियत को वार्ता से दूर रखने के मोदी सरकार के प्रयास को क्या वह सकारात्मक तौर पर देखते हैं, यह पूछे जाने पर कसूरी ने कहा, “मुझे लगता है कि इसका असर नकारात्मक होगा। इससे पाकिस्तानियों के आम जन का विचार नकारात्मक होगा। मैंने अपनी किताब ‘नाइदर अ हॉक नॉर अ डव’ में भी बार-बार दोहराया है कि हम चाहते हैं कि कश्मीरी मध्यस्थता का हिस्सा बनें। भारत यह कभी स्वीकार नहीं करेगा।”

उन्होंने कहा कि कश्मीरियों को इसका हिस्सा बनाकर कश्मीर मसले पर उन्हें हर कदम से आगाह करना जरूरी है, ताकि वे यह कहकर उसे नकार न दें कि उनसे इस बारे में सलाह नहीं ली गई।

भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिवों की 15 जनवरी को बातचीत शुरू होने जा रही है, क्या ट्रैक-2 पहल के बिना कोई प्रगति संभव है? इसके जवाब में कसूरी ने कहा, “मुझे लगता है कि समाज और जनता से जनता के बीच संपर्क यकीनन सकारात्मक भूमिका निभा सकता है। ट्रैक-2 का अर्थ अगर ऐसे दिग्गज और अनुभवी नागरिकों से है, जो राजनीतिक, सैन्य या प्रशासनिक क्षेत्रों में अनुभवी हों तो मैं खुले दिल से इसका स्वागत करूंगा।”

शरीफ के शांति के नए प्रयास में क्या पाकिस्तानी सेना उनके साथ है? उन्होंने कहा, “कारगिल के दौरान मैं विदेशमंत्री नहीं था। हाल ही में किसी व्यक्ति ने मुझे बताया कि कारगिल भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेयी की यात्रा से पहले ही शुरू हो चुका था। या तो शरीफ इस बात से अनजान थे या फिर अगर वह यह जानते थे तो उन्होंने इसे प्राथमिक स्तर पर गंभीरता से नहीं लिया। हो सकता है कि उन्हें लगा हो कि भारत और पाकिस्तान के बीच यह लंबे समय से होता रहा है, लेकिन बाद में कारगिल अभियान की गंभीरता ने भारत और शरीफ दोनों को हैरानी में डाल दिया।”

मोदी की लाहौर यात्रा में अमेरिकी दबाव के सवाल पर पूर्व पाकिस्तानी विदेशमंत्री ने ‘दबाव’ की जगह ‘समझाने’ को उपयुक्त शब्द बताते हुए कहा कि “पाकिस्तान और भारत दोनों ही बड़े देश हैं, जो किसी के दबाव के आगे नहीं झुकेंगे। जब पाकिस्तान अमेरिका के दबाव से निपट सकता है तो भारत भी ऐसा कर सकता है। अन्य पश्चिमी देशों सहित अमेरिका अफगानिस्तान में स्थिरता चाहता है। दोनों देशों के बीच बातचीत को बढ़ावा देकर अमेरिका केवल अपना हित ही साध रहा है।”

भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध मजबूत करने के लिए जरूरी कदमों के बारे में कसूरी ने कहा, “दुखद है कि अभी तक पाकिस्तान और भारत दोनों में ही परिपक्व राजनीतिक संस्कृति विकसित नहीं हुई है। राजनीतिक पार्टियां सत्ता में होने पर अलग बात कहती हैं और विपक्ष में होने पर अलग। मैं दोनों देशों से आगामी वार्ता को न केवल समझदारी से, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी करने का आग्रह करता हूं। अपने अनुभव के आधार पर मैं अनुमान लगा सकता हूं कि अगर भारत इसमें सकारात्मक योगदान नहीं देगा, तो पाकिस्तान भी हरगिज नहीं देगा और मौजूदा वार्ता प्रक्रिया शीघ्र ही समाप्त हो जाएगी। लेकिन अगर भारत एक कदम आगे बढ़ाएगा तो पाकिस्तान उससे भी अधिक आगे बढ़ेगा।”

कसूरी ने कहा कि दोनों देशों की दोस्ती बहुत फलदायी होगी, और दोनों इसका बखूबी लाभ उठा सकते हैं।

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