भारत की दावेदारी पर एनएसजी बैठक में होगा विचार (लीड-1)

ताशकंद/सियोल, 23 जून (आईएएनएस)। परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की सदस्यता के लिए भारत के आवेदन पर 48 देशों के इस गुट में सियोल में गुरुवार रात को विशेष सत्र में चर्चा होगी। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भारत के आवेदन का मूल्यांकन ‘योग्यता’ के आधार पर करने का आग्रह किया है।

सियोल के एक उच्च जानकार सूत्र ने आईएएनएस को बताया कि एनएसजी सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल के प्रमुखों की रात्रिभोज के बाद होने वाली बैठक में भारत की सदस्यता पर चर्चा की जाएगी।

हालांकि, बंद कमरे में होने वाली इस बैठक में चर्चा का मुख्य एजेंडा भारत का आवेदन नहीं है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि जापान ने इस मामले को शुरुआती सत्र में उठाया था। इसके बाद यह फैसला किया गया कि अध्यक्ष अर्जेटीना के राफेल ग्रोस्सी द्वारा आहूत विशेष सत्र में इस पर चर्चा की जाएगी।

अर्जेटीना और दक्षिण कोरिया के साथ कई प्रमुख सदस्य देश जैसे अमेरिका, ब्रिटेन, इटली, मैक्सिको, स्विटरलैंड और रूस भारत की एनएसजी सदस्यता का समर्थन कर रहे हैं।

चीन भारत के एनएसजी में प्रवेश का विरोध कर रहा है। यह संस्था ही वैश्विक परमाणु व्यापार और प्रौद्योगिकी को नियंत्रित करती है। चीन का कहना है कि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किया है, इसलिए उसे एनएसजी की सदस्यता नहीं मिलनी चाहिए। चीन के इस मत का तुर्की, दक्षिण अफ्रीका, आयरलैंड, ऑस्ट्रिया और न्यूजीलैंड समर्थन कर रहे हैं।

चीन ने एनएसजी सदस्यता के लिए पाकिस्तान का समर्थन कर परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर किए बिना भारत के सदस्य बनने की राह में बड़ा रोड़ा लगा दिया है।

चीन ने जोर दिया है कि अगर भारत को कोई छूट दी जाती है, तो वही छूट पाकिस्तान को भी दी जानी चाहिए। जबकि, पाकिस्तान का परमाणु अप्रसार को लेकर कथित रूप से बुरा रिकार्ड रहा है। कहा जाता है कि उसने लीबिया, ईरान और उत्तर कोरिया को परमाणु हथियार प्रौद्योगिकी बेची थी।

उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में हुए शंघाई कारपोरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात कर चीन से गुजारिश की कि वह भारत की एनएसजी सदस्यता का मूल्यांकन ‘योग्यता’ के आधार पर करें।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने यहां ेसंवाददाताओं को यह जानकारी देते हुए कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने चीन से गुजारिश की है कि वह भारत के आवेदन पर एक निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ आकलन करे और योग्यता के आधार पर निर्णय ले।”

यह पूछे जाने पर कि 48 देशों के इस संगठन में भारत को शामिल करने की कितनी संभावना है, उन्होंने कहा, “इस संबंध में जटिल और नाजुक बातचीत की प्रक्रिया चल रही है। मुझे जो कहना था, वह मैं आपसे कह चुका हूं।”

भारत इस समूह की सदस्यता प्राप्त करने के लिए प्रचंड कूटनीतिक प्रयास में जुटा है। एनएसजी आम सहमति पर काम करता है और इसमें किसी नए सदस्य को सभी मौजूदा सदस्यों की सहमति के बाद ही शामिल किया जा सकता है।

विदेश सचिव एस. जयशंकर फिलहाल भारत की एनएसजी सदस्यता के लिए कूटनीतिक प्रयास बढ़ाने के लिए सियोल में मौजूद हैं।

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