भारत, ब्रिटेन जलवायु परिवर्तन से मिलकर निपटेंगे

लंदन, 13 नवंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन में उनके समकक्ष डेविड कैमरन ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई। ऊर्जा सहयोग बढ़ाने के संबंध में दोनों देशों के बीच एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए।

साझा बयान के मुताबिक, “जलवायु परिवर्तन इस सदी की वैश्विक चुनौतियों में से एक है, जिसका राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।”

कैमरन और मोदी ने दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग बढ़ाने और विद्युत बाजार सुधार, ऊर्जा दक्षता, तटीय पवन, सौर ऊर्जा, स्मार्ट ग्रिड, ऊर्जा भंडारण और ऑफ ग्रिड नवीकरणीय ऊर्जा सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भावी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए गुरुवार को ज्ञापन (एओयू) पर हस्ताक्षर किए।

दोनों नेताओं ने दिसंबर 2015 में पेरिस जलवायु सम्मेलन में युनाइटेड नेशन्स फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (यूएनएपसीसीसी) के तहत व्यापक समझौते के लिए मिलकर काम करने के लिए भी प्रतिबद्धता जताई है।

दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने संयुक्त नवीकरणीय ऊर्जा अनुसंधान केंद्रों के लिए रिसर्च काउंसिल्स यूके और भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से एक करोड़ पाउंड के संयुक्त वित्त का ऐलान किया। इस तरह भारत-ब्रिटेन ऊर्जा अनुसंधान कार्यक्रम की कुल लागत छह करोड़ पाउंड है।

कैमरन ने ग्रीन इन्वेस्टमेंट बैंक के साथ यूके ब्रिटेन निवेश उपक्रम का ऐलान किया, जिससे भारत और अफ्रीका में नवीकरणीय ऊर्जा एवं ऊर्जा दक्षता परियोजनाओं में कुल 20 करोड़ पाउंड का निवेश होगा। उन्होंने भारत के ऊर्जा क्षेत्र में राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर सुधारों में मदद के लिए एक करोड़ पाउंड की लागत वाली पंचवर्षीय योजना का भी ऐलान किया।

कैमरन ने वर्ष 2050 तक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कम से कम 80 प्रतिशत की कटौती करने की ब्रिटेन की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।

मोदी ने भी 2030 तक ग्रीनहाउस गैस उत्सजर्न में कम से कम 80 प्रतिशत तक की कटौती करने की भारत की प्रतिबद्धता जताई।

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