भारत में आतंकवाद दूसरे देशों से संचालित : मोदी

indexन्यूयार्क, 30 सितम्बर – भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने सोमवार को कहा कि भारत में आतंकवाद दूसरे देशों से संचालित है और इसकी शुरुआत देश में नहीं हुई है। मोदी न्यूयॉर्क स्थित विदेशी मामलों की परिषद में अपने सम्बोधन में यह बात स्पष्ट की।

उन्होंने कहा कि आतंकवाद मानवता का दुश्मन है और इसलिए सम्पूर्ण विश्व को आतंकवाद के विरुद्ध एकजुट होना चाहिए।

मोदी ने खेद जताया कि कई सारे देश आतंकवाद के खतरे को कभी समझ नहीं पाए। उन्होंने कहा कि आतंकवाद एक ऐसा खतरा है, जिसके साथ बहुत गंभीरता से निपटने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत के मुसलमान अलकायदा के आह्वान से प्रभावित नहीं होंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “जहां तक भारत का प्रश्न है भगवान बुद्ध और महात्मा गांधी भारत के प्रतीक हैं।”

मोदी ने कहा कि अमरीका को इराक की गलती अफगानिस्तान में नहीं दोहरानी चाहिए और अफगानिस्तान से धीरे-धीरे सुरक्षा बलों की वापसी होनी चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत और अमरीका के बीच साझेदारी लोकतंत्र और उदारता की साझा विचारधारा पर आधारित है।”

मोदी ने भारत-चीन सीमा विवाद पर कहा, “भारत और चीन सीमा विवाद को सुलझाने की क्षमता रखते हैं और इस सम्बंध में मध्यस्थता की कोई आवश्यकता नहीं है।”

नरेन्द्र मोदी ने कहा कि लोगों ने हाल ही में हुए आम चुनाव में सुशासन और विकास के लिए मतदान किया और अब आत्मविश्वास का एक माहौल है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार लालफीताशाही को कम करने और निवेश बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

मोदी ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि बिजली एक आवश्यकता बन गई है और उनकी सरकार लोगों को लगातार 24 घंटे बिजली प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। विकास और पर्यावरण एक दूसरे के विरोधी नहीं है और इस मामले में संतुलन कायम किया जा सकता है।

विदेशी मामलों की परिषद में सम्बोधन और बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने सरकार द्वारा स्वच्छ ऊर्जा के प्रति किए जा रहे कार्यों का विवरण भी दिया।

प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत व्यापार सुविधा समझौते के विरुद्ध नहीं है लेकिन इसमें भारत के बड़ी संख्या में गरीब लोगों के कल्याण का ध्यान भी रखा जाना चाहिए। इसलिए व्यापार सुविधा समझौता और खाद्य सुरक्षा एक साथ होने चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी ने गुटनिरपेक्ष और भारत की विदेश नीति पर पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि 21वीं सदी में सभी देश एक दूसरे पर निर्भर हैं और सभी देशों की एक दूसरे की भलाई में भागीदारी है।

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