मंगल से जुड़े नए साक्ष्य बदल देंगे जलवायु का इतिहास

न्यूयार्क, 29 जनवरी (आईएएनएस)। ब्राउन विश्वविद्यालय के भूगर्भ वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह के कुछ हिस्सों में पिछले कुछ समय में कई बार ग्लेशियर की तरह के बर्फ विशाल भंडार बनने और खिसकते रहने के नए प्रमाण पाए हैं।

अनुसंधानकर्ताओं ने मंगल ग्रह की भूमध्य रेखा पर मिले उल्कापिंडो के गिरने से बने विशाल गड्ढों की दीवारों पर निर्मित जलमार्ग जैसी सैकड़ों भूआकृतियों का अध्ययन किया।

अनुसंधान के निष्कर्ष के अनुसार, जलमार्ग जैसी ये आकृतियां बर्फ के भंडार के पिघलकर खिसकने से बनीं हैं। ऐसा माना जाता है कि पिछले 20 लाख वर्षो के दौरान मंगल की भूमध्य रेखा पर यह आकृतियां उभरीं।

अध्ययन में जलमार्गो के निर्माण के बिल्कुल अलग कारण मिले हैं। नए साक्ष्यों के अनुसार, बर्फ के इन विशाल भंडारों के पिछले कई लाख वर्षो बीच कई बार विस्तृत होने और सिकुड़ने से जलमार्ग जैसी ये आकृतियां बनीं। अपेक्षाकृत रूप से मंगल के इतिहास में हाल के 4.5 अरब वर्षो की अवधि में यह सब घटनाएं हुईं।

ब्राउन विश्वविद्यालय में अनुसंधानकर्ता जाय डिक्सन ने कहा, “हाल के इन जयवायु चक्रों का अनुमान कंप्यूटर मॉडलों के द्वारा लगाया गया, लेकिन इनका विस्तृत भूगर्भीय प्रमाण के साथ अभिलेख तैयार नहीं किया गया है।”

नया अनुसंधान दर्शाता है कि मंगल के संपूर्ण दक्षिणी गोलार्ध में जलमार्ग प्रासंगिक रूप से हैं। जलमार्गो के पाए जाने में यह असमानता मंगल ग्रह के वैश्विक जलवायु परिवर्तन का संकेत है।

अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि मंगल पर हाल ही में रहा यह हिमयुग मंगल के अपने अक्ष पर अस्थिर परिक्रमण करने कारण है।

शोध पत्रिका ‘आईकेरस’ के ताजा अंक में प्रकाशित शोध-पत्र के अनुसार, वर्तमान में मंगल अपने अक्ष से करीब 25 डिग्री झुका हुआ है तथा यह झुकाव पृथ्वी के लगभग समान है।

लेकिन मंगल के परिक्रमण को स्थिर रखने के लिए उसके पास कोई विशाल चांद नहीं है, इसलिए उसका झुकाव 15 डिग्री से 35 डिग्री के बीच डोलता रहता है।

पृथ्वी का अपने अक्ष से झुकाव तुलनात्मक रूप से केवल 2.4 डिग्री ही परिवर्तित होता है।

कंप्यूटर मॉडल के अनुसार, जब मंगल का अक्ष 30 डिग्री से बढ़ जाता है तो ध्रुवों पर सूर्य की रोशनी बढ़ जाती है जिससे आच्छादित बर्फ का पानी वाष्पित होने लगता है।

वह पानी वहां से दूसरी जगह जाता है और भूमध्य रेखा के समीप हिमनद के रूप में जमा हो जाता है।

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