कोलंबो, 13 मार्च (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और श्रीलंका के बीच मछुआरों के मुद्दे को बेहद ‘जटिल’ करार देते हुए कहा कि यह आजीविका और मानवीय चिंता से जुड़ा मुद्दा है और दोनों पक्षों को इसका दीर्घकालिक समाधान ढूंढने की जरूरत है।
श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरिसेना के साथ बातचीत के बाद जारी बयान में मोदी ने कहा कि यह दोनों ओर के मछुआरा एसोसिएशन के लिए भी महत्वपूर्ण है कि वे जल्द से जल्द बैठक करें और दोनों पक्षों के लिए स्वीकार्य समाधान तक पहुंचें, जिसे बाद में दोनों देशों की सरकारें आगे बढ़ाएंगी।
तमिल बहुल उत्तरी इलाके को शक्तियां सौंपने के मुद्दे पर मोदी ने कहा कि 13वें संशोधन के जल्द और पूर्ण क्रियान्वयन से समानता, न्याय और सम्मान आधारित संयुक्त श्रीलंका के निर्माण की प्रक्रिया में मदद मिलेगी।
उन्होंने दोनों पड़ोसी देशों के बीच संबंध मजबूत करने पर भी जोर देते हुए कहा कि वह राष्ट्रपति सिरिसेना के भारत दौरे के कुछ ही समय बाद श्रीलंका का दौरा कर प्रसन्न हैं।
मोदी ने कहा, “वास्तव में दो देशों के बीच इसी प्रकार चीजें होनी चाहिए। यह साझा चिंताओं का समाधान ढूंढने में मदद करेगा और संबंध को आगे ले जाएगा।”
दोनों पक्षों ने मोदी और सिरिसेना के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक के बाद चार समझौते पर हस्ताक्षर भी हुए।
यह समझौता कूटनीतिक स्तर के पासपोर्ट पाने वालों को वीजा में छूट, सीमा शुल्क में पारस्परिक सहयोग, युवा विकास और श्रीलंका विश्वविद्यालय में रबिंद्रनाथ टैगोर संग्रहालय की स्थापना से संबंधित है।
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