मन से नहीं, दिल से है मिर्गी का नाता

न्यूयार्क, 10 मार्च (आईएएनएस)। ज्यादातर डॉक्टर एपिलेप्सी यानी मिर्गी रोग को मानसिक विकार करार देते हैं, लेकिन एक नए शोध में हृदय की कार्यप्रणाली का मिर्गी रोग के साथ संबंध देखने को मिला है।

शोधार्थियों को एक अध्ययन में हृदय की गतिशीलता में कुछ बदलावों की वजह से बच्चों में मिर्गी रोग के लक्षण देखने को मिले।

अमेरिका की केस वेस्टर्न यूनिवर्सिटी से इस अध्ययन के वरिष्ठ लेखक रॉबटरे फर्नाडीज गलान ने बताया, “हृदय दर परिवर्तनशीलता के अध्ययन से पता चला है कि नींद के दौरान सहानुकंपी तंत्रिका प्रणाली में मिर्गी प्रभावी हो जाती है।”

उन्होंने कहा, “लेकिन हम नहीं जानते कि यह विषमता मिर्गी की संयोगवश क्षतिपूर्ति करता है।”

इस शोध के लिए वैज्ञानिकों ने सामान्य मिर्गीग्रस्त 91 बच्चों और किशोरों का अध्ययन किया।

शोधार्थियों ने पाया कि सहानुकंपी तंत्रिका तंत्र नींद के दौरान स्वस्थ्य बच्चों की अपेक्षा मिर्गी ग्रस्त बच्चों में श्वसन तंत्र में परिवर्तन कर हृदय गति को धीमा कर देता है।

यह शोध ‘न्यूरोफिजियोलॉजी’ पत्रिका के ऑनलाइन संस्करण में प्रकाशित हुआ है।

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