इस खिताबी जीत के साथ ही जापान ने रियो ओलम्पिक-2016 के लिए भी क्वालीफाई कर लिया।
जापान के लिए दहाई में अंक हासिल करने वाली खिलाड़ियों में सनाई मोटोकावा ने सर्वाधिक 24 अंक जुटाए। रामू टोकाशिकी ने 18 अंक जुटाए और सात बोर्ड हासिल किए।
टूर्नामेंट की ऑल स्टार फाइव में चीन की शाओ टिंग और सुन मेनग्रान रहीं, जबकि जापान की रामू, असामी योशिदा और दक्षिण कोरिया की किम डानबी भी इसमें अपना नाम दर्ज करवाने में सफल रहीं।
रामू टोकाशिकी ने बैंकॉक-2013 के बाद लगातार दूसरे संस्करण में मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर का अवार्ड जीता।
फाइनल मुकाबले में शाओ टिंग ने स्कोरिंग शुरू की। हालांकि नाक से खून आ जाने के कारण दिग्गज झांग फैन को कोर्ट में उनकी जगह लेनी पड़ी। झांग का आना हालांकि टीम के लिए फायदेमंद ही साबित हुआ।
एक समय 9-10 से पीछे चल रही गत चैम्पियन जापानी टीम ने पहले क्वार्टर की समाप्ति पर 23-11 की बढ़त हासिल कर ली थी।
दूसरे क्वार्टर में भी जापान का दबदबा कायम रहा और मध्यांतर तक उन्होंने 22 अंकों की बड़ी बढ़त हासिल कर ली।
दर्शकों द्वारा लगातार प्रोत्साहित किए जाने के बावजूद चीनी टीम अपने प्रदर्शन में सुधार नहीं ला सकी और तीसरे क्वार्टर की समाप्ति तक जापान 30 अंकों की बढ़त ले चुका था।
आखिरी क्वार्टर में बेहतर संघर्ष करते हुए चीनी टीम एक समय बढ़त को 22 अंकों तक नीचे लाने में सफल रही, हालांकि उसके बाद जापान ने कोई मौका दिए बगैर लगातार 12 अंक अर्जित किए और 35 अंकों के विशाल अंतर से जीत हासिल की।
चीन की कोई भी खिलाड़ी दहाई में अंक नहीं जुटा पाईं।
कांस्य पदक के लिए हुए मुकाबले में दक्षिण कोरिया ने चीनी ताइपे को 52-45 से हराया।
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