नई दिल्ली – सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि मानहानि को अपराध की श्रेणी से बाहर निकालने का समय आ गया है. जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने न्यूज पोर्टल द वायर की एक याचिका पर सुनवाई करने के दौरान यह टिप्पणी की. द वायर ने जेएनयू की प्रोफेसर अमिता सिंह द्वारा दाखिल किए गए मानहानि के मामले में उसके खिलाफ जारी हुए समनों को कोर्ट में चुनौती दी थी. जिसके बाद कोर्ट ने अमिता सिंह को नोटिस जारी कर दिया.
जस्टिस सुंदरेश ने मौखिक टिप्पणी की, मुझे लगता है कि इस सभी मानहानि को अपराध की श्रेणी से बाहर निकालने का समय आ गया है. द वायर की ओर से पेश हुए वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट की इस टिप्पणी से सहमति जताई. बार एंड बेंच के मुताबिक, भारत उन चुनिंदा लोकतांत्रिक देशों में शामिल है, जहां मानहानि एक आपराधिक दोष है. ज्यादातर न्यायक्षेत्रों में मानहानि के खिलाफ केवल सिविल मामले चलाए जाते हैं.
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