मुजफ्फरपुर के “पप्पू भैया’ ने कैसे बचाईं सैकड़ों जिंदगियां “चमकी” से

64697300_2201660606597616_8364125595491106816_n65099959_2201660759930934_1627477436188852224_nमुजफ्फरपुर- मुजफ्फरपुर के इलाके में कुछ लोग तमाम मीडिया से दूर रहकर बहुत गंभीरता से काम कर रहे हैं. यह तसवीर चंद्रहट्टी से आयी है. पटना से मुजफ्फरपुर जाने के रास्ते में शहर से कोई दस किलोमीटर पहले पड़ता है यह गांव. वहां एक जगन्नाथ मंदिर है, जिसकी देखरेख पप्पू भइया करते हैं. कभी मौका मिले तो वहां जाना चाहिए. पप्पू भइया और मंदिर पर बात कभी फिर विस्तार से होगी. चंद्रहट्टी उस मंदिर को देखने नहीं, उस मंदिर के सरोकार को देखने जाइये. पप्पू भइया से कल रात इंसेफलाइटिस पर बात हो रही थी. फिर उन्होंने रात में तसवीरें भेजीं. कुढ़हनी ब्लॉक में आता है उनका क्षेत्र.पप्पू भइया ने बताया कि हमलोग इस बार सतर्क थे. अपने स्तर पर तैयारी कर लिये थे. बिहार की सरकार की ओर से इंसेफलाइटिस के लिए लिटरेचर छपा है, उसे इलाके में जो झोलाछाप डाक्टर हैं, उन्हें दिये, उनसे आग्रह किये कि पहले लोग आपके पास ही जायेंगे, यह तय है लेकिन अगर जायेंगे तो लिटरेचर में जो लिखा हुआ है, उसी तरह से उपचार कीजिएगा. उस लिटरेचर में विस्तार से लिखा हुआ है कि क्या क्या करना है, एनस में इंजेक्शन देना है तो कैसे देना है. पप्पू भइया बोले कि स्वास्थ्य केंद्र पर धरना देते तो शायद इस साल फिर से हमारे यहां भी महामारी का असर उतना ही रहता, इसलिए हमलोगों ने झोला छाप डॉक्टरों को आग्रह किया, उन्हें प्रशिक्षित किया. फिर आटो से गांव गांव में प्रचार शुरू हुआ कि कैसे रहना है, क्या करना है. यह सब बज्जिका भाषा में किया गया, ताकि जिन्हें समझना है, वे समझ सके, कनेक्ट हो सके. पहले से सतर्क रहने का असर हुआ. लोग सचेत रहे. पप्पू भइया बोले कि मुसिबत का आना तो तय ही रहता है तो सरकार से क्या लड़ते भिड़ते, पहले लोगों को सचेत, जागरूक कर, जो भी संसाधन उपलब्ध है, उसे व्यवस्थित कर बच्चों को बचाना जरूरी था, इसलिए यह रास्ता अपनाया.

15267982_1162466963850324_5486177776978352612_nनिराला जी की फेसबुक वाल से साभार 

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