नई दिल्ली, 2 नवंबर (आईएएनएस)। अंतर्राष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज इनवेस्टर्स सर्विस ने सोमवार को भारतीय बैंकों का आउटलुक ‘नकारात्मक’ से बढ़ाकर ‘स्थिर’ कर दिया।
मूडीज ने भविष्य में बैंकों द्वारा दिए जा रहे वसूल न किए जा सकने वाले ऋणों में कमी आने की संभावना के चलते उनकी रेटिंग में यह सुधार किया है।
अमेरिकी रेटिंग एजेंसी ने नवंबर, 2011 में भारतीय बैंकों के लिए आउटलुक ‘नकारात्मक’ किया था।
मूडीज के उपाध्यक्ष श्रीकांत वाडलामणि ने कहा, “भारतीय बैंक प्रणाली के लिए अगले 12-18 महीनों के लिए स्टेबल आउटलुक भारतीय बैंकों द्वारा भविष्य में अपनी कार्यप्रणाली में सुधार किए जाने की उम्मीद को दर्शाता है। हमें उम्मीद है कि भारतीय बैंक भविष्य में वसूल न किए जा सकने वाले ऋण देने में कमी लाएंगे, जिससे खराब ऋण अनुपात में स्थिरता आएगी।”
मूडीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, “लाभ और कार्यकुशलता में स्थिरता और सरकार का समर्थन भारतीय बैंकिंग सेक्टर को स्टेबल आउटलुक प्रदान करता है।”
मूडीज ने 2015-16 वित्त वर्ष में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 7.5 प्रतिशत की विकास दर से बढ़ने की उम्मीद व्यक्त की है।
मूडीज ने भारत के 15 शीर्ष बैंकों की रेटिंग की है। ये 15 बैंक भारतीय बैंक बाजार का 70 फीसदी हिस्सा कवर करते हैं। इनमें चार निजी क्षेत्र के और 11 सरकारी बैंक हैं।
मूडीज के अनुसार, सरकारी बैंकों का पूंजी स्तर कम है और सरकार द्वारा निजी क्षेत्र के उपक्रम वाले बैंकों को अगले चार वर्षो में 70,000 करोड़ रुपये दिए जाने की घोषणा ‘स्पष्टत: सकारात्मक’ है।
हालांकि मूडीज की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि ‘यह राशि बैंकों की कुल जरूरत का बहुत थोड़ा हिस्सा’ ही है।
सरकार के सहयोग के संबंध में मूडीज का कहना है कि निजी क्षेत्र के बैंकों के संबंध में उन्हें सरकार की ओर से सहयोग कम किए जाने का संकेत देने वाला कोई फेरबदल किए जाने की उम्मीद नहीं है।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने केंद्रीय बजट में मौजूदा वित्त वर्ष में निजी क्षेत्रों के बैंकों के पुनर्पूजीकरण के लिए 7,940 करोड़ रुपयों के बजट की घोषणा की थी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले वर्ष दिसंबर में सरकारी बैंकों को कई चरणों में 52 फीसदी तक सरकारी साझेदारी बेचकर पूंजी बाजार से 160,000 करोड़ रुपये तक पूंजी जुटाने की अनुमति दे दी थी।
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