मोदी के संदेश ने चीनी बौद्ध भिक्षुओं को असमंजस में डाला

बीजिंग, 18 मई (आईएएनएस)। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चीन प्रवास के दौरान एक मंदिर के दौरे के दौरान गुजराती भाषा में लिखे गए संदेश को लेकर मंदिर के बौद्ध भिक्षु असमंजस में पड़ गए। मोदी के संदेश को समझने के लिए बौद्ध भिक्षुओं को तीन चरणों में इसका अनुवाद कराना पड़ा।

समाचार पत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ के अनुसार, मोदी ने चीन प्रवास के दौरान शांक्सी प्रांत के शियान स्थित दाशिंगशान मंदिर के दौरे के दौरान गुरुवार को गुजराती बौद्ध भिक्षु धर्मगुप्त की प्रशंसा में गुजराती में संदेश लिखा था, जो सुई वंश के दौरान मंदिर में रहते थे। मोदी ने बौद्ध धर्म के लिए धर्मगुप्त के योगदान की प्रशंसा की थी और विश्व शांति की उनकी खोज के बारे में लिखा था।

शियान की नॉर्थवेस्ट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ली लियान ने बताया कि मोदी ने यह संदेश अपनी मातृभाषा गुजराती में लिखा था, जो पश्चिम भारत में 4.6 करोड़ लोगों की भाषा है, लेकिन चीन में गुजराती बोलने वाले लोग कम है।

मंदिर के महंत ने मोदी के संदेश का अनुवाद करने के लिए सबसे पहले ली से संपर्क किया, जिसके बाद ली ने संदेश को छात्र गुआन शिउजी के पास भेजा।

गुआन ने यह देखकर कि संदेश गुजराती में है, इसे अपने एक भारतीय मित्र के पास भेजा, जिसने संदेश का अनुवाद हिंदी में किया। इसके बाद गुआन ने संदेश को हिंदी से अंग्रेजी में अनुवाद किया और आखिर में ली ने इसे चीनी में अनुवाद कर मंदिर के महंत को सौंप दिया।

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