यूएई के विकास में भारतीय समुदाय का बड़ा योगदान

दुबई, 11 फरवरी (आईएएनएस)। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के विकास में भारतीय समुदाय का बहुत बड़ा योगदान है। यूएई की सफलता के तीन स्तंभ हैं, जिनमें से एक भारतीय समुदाय है। यह बात यूएई के पूर्व राजनयिक मिर्जा हुसैन अल साएग ने कही है।

अल साएग का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब बुधवार को अबूधाबी के शहजादे और यूएई की सेना के उप सर्वोच्च कमांडर शेख मुहम्मद बिन जायद अल नाहयान तीन दिवसीय भारत दौरे पर पहुंचे हैं।

अल साएग ने अंग्रेजी अखबार गल्फ न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में कहा, “यूएई का शाही परिवार, वहां के नागरिक और भारतीय-ये वे तीन स्तंभ हैं, जिनकी बदौलत यूएई वह बन सका है जो वह अब है। हम भारत को अपने बड़े भाई के रूप में देखते हैं।”

अल साएग 1973 में नई दिल्ली में यूएई के उप-राजदूत थे। वह वर्ष 1974-75 में मुंबई स्थित यूएई के वाणिज्य दूतावास के प्रमुख भी रह चुके हैं।

उन्होंने भारत और यूएई के एक शताब्दी से भी अधिक पुराने मजबूत रिश्ते की बात दोहराई।

उन्होंने कहा कि अल नाहयान का यह भारत दौरा दोनों देशों के बीच के भाईचारे और सहयोग की दिशा में एक और मील का पत्थर है।

उनका यह दौरा भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले साल अगस्त में यूएई के दौरे के बाद हो रहा है।

अल साएग ने कहा कि सन् 1894 में शेख मक्तूम बिन हाशर के शासनकाल से ही यूएई का भारत के साथ एक स्थायी और भरोसे वाला रिश्ता है।

उन्होंने कहा, “यूएई के लोग भारत पर इसलिए भरोसा करते है, क्योंकि यह एक आपूर्ति का स्रोत है। इसके साथ ही व्यापारियों के लिए व्यापार का मुख्य मार्ग है, चाहे वह खाने-पीने का सामान हो या दवाएं हों। इसी तरह यूएई खजूर और अन्य बहुमूल्य सामान को बेचने के लिए इस व्यापार मार्ग का इस्तेमाल कर सकता है।”

उन्होंने कहा कि वर्ष 1981 में इंदिरा गांधी के यूएई दौरे के बाद भारत के साथ उसके रिश्ते को बल मिला और दोनों देशों के संबंध नई ऊंचाई तक पहुंचे।

इंदिरा गांधी पहली भारतीय प्रधानमंत्री थीं जो यूएई गई थीं।

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