डबलिन, 23 सितम्बर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को आयरलैंड के प्रधानमंत्री एंडा केनी के साथ वार्ता की और एक निश्चित समय के अंदर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार तथा भारत की स्थायी सदस्यता पर आयरलैंड के समर्थन की मांग की।
एक दिवसीय यात्रा पर आयरलैंड पहुंचे मोदी ने कहा कि केनी के साथ वार्ता के दौरान उन्होंने आतंकवाद, कट्टरता व यूरोप व एशिया के हालात सहित व्यापक अंतर्राष्ट्रीय चुनौतियों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
बीते 59 वर्षो के दौरान आयरलैंड का दौरा करने वाले मोदी पहले प्रधानमंत्री बन गए हैं।
उन्होंने कहा, “साल 2008 में परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) से छूट पाने में आयरलैंड की भूमिका महत्वपूर्ण थी। भारत में ऊर्जा की बढ़ती मांग के मद्देनजर उसने एक सतत विकास पथ के लिए एक बड़े विकल्प का मार्ग खोला।”
उन्होंने कहा, “मैंने अब भारत के लिए एनएसजी की सदस्यता तथा अन्य अंतर्राष्ट्रीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्था में आयरलैंड के समर्थन की मांग की है। एनएसजी में भारत की सदस्यता से हमारे द्विपक्षीय सहयोग गहरे होंगे और अंतर्राष्ट्रीय अप्रसार प्रयास मजबूत होंगे।”
उन्होंने कहा कि शांति बरकरार रखने के अभियानों में दोनों देश साझेदार रहे हैं। मोदी ने कहा, “सतत विकास लक्ष्यों पर नेतृत्व के लिए मैं आयरलैंड को धन्यवाद देता हूं।”
मोदी ने कहा कि 26 हजार भारतीय आयरिश समुदाय के जीवंत हिस्सा हैं।
मोदी ने कहा, “और, एयर इंडिया कनिष्क विमान बमकांड के पीड़ितों को यहां सदगति मिली। उन्हें स्मारक देकर उनका सम्मान करने के लिए मैं उस त्रासदी की 30वीं बरसी पर आयरलैंड को धन्यवाद देता हूं।”
उन्होंने कहा कि भारत व आयरलैंड को साझेदारी व सहयोग के मौकों की तलाश करनी चाहिए।
मोदी ने कहा, “भारत व आयरलैंड एशिया व यूरोप के सबसे तेजी से तरक्की करने वाले देशों में शामिल हैं। हमें इस बात की प्रसन्नता है कि वैश्विक व क्षेत्रीय चुनौतियों के बावजूद हमारा द्विपक्षीय व्यापार व निवेश संबंध विकसित हो रहा है। हमारे बीच आर्थिक साझेदारी प्रौद्योगिकी – सूचना प्रौद्योगिकी, जैव तकनीक व फार्मास्युटिकल्स, कृषि व स्वच्छ ऊर्जा पर मजबूती से केंद्रित हो सकता है।”
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर ठप पड़ी वार्ता पर उन्होंने कहा, “भारत के वाणिज्यिक हितों व चुनौतियों पर यूरोपीय संघ की संवेदनशीलता भारत-यूरोपीय संघ व्यापक आधार वाले व्यापार व निवेश समझौते पर चर्चा को फिर से शुरू करने में मदद करेगी।”
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