मैड्रिड, 28 जून (आईएएनएस)। दो बार यूरोपियन फुटबाल चैम्पियनशिप खिताब पर कब्जा जमाने वाली टीम स्पेन का यूरो 2016 का सफर सोमवार रात समाप्त हो गया।
नॉकआउट दौर में इटली के खिलाफ मुकाबले में 2-0 से हार का सामना करने वाली मौजूदा विजेता स्पेन के टूर्नामेंट से बाहर होने के साथ ही एक विजयी युग का भी अंत हो गया है।
स्पेन की निराशाजनक हार के बाद यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि विसेंते डेल बोस्क कोच पद से इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि, अभी तक कुछ भी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं हुआ है।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, बोस्क के नेतृत्व में स्पेन की टीम ने 2010 विश्व कप खिताब और 2012 यूरो कप खिताब अपने नाम किया और एक मजबूत दावेदार के रूप में दबदबा बनाते हुए मुकाबले जीतती गई।
ऐसा नहीं है कि स्पेन के खेल के गिरते हुए स्तर का चेहरा ऐसे अचानक से सामने आया है। इसका अहसास 2014 फीफा विश्व कप में ही हो गया था, जहां अपने निराशाजनक प्रदर्शन के कारण टीम को ग्रुप-स्तर पर ही ब्राजील के हाथों हार का सामना कर बाहर होना पड़ा था।
यूरो 2016 के ग्रुप-स्तर के अंतिम मुकाबले में क्रोएशिया से हारकर नॉकआउट दौर में प्रवेश करने वाली स्पेन टीम के सामने प्रतिद्वंद्वी के रूप में इटली की मजबूत टीम खड़ी थी।
अपने अच्छे प्रदर्शन के कारण आत्मविश्वास से लबरेज इटली की टीम का लक्ष्य केवल एक ही था, 2012 के यूरो फाइनल में 0-4 से मिली हार का बदला लेना।
बोस्क ने हार के बाद मजबूती दिखाने की कोशिश की। उनसे जब उनके भविष्य के बारे में पूछा गया, तो स्पेन के कोच ने कहा कि वह अपने फैसले के बारे में स्पेनिश फुटबाल महासंघ के अध्यक्ष एंजेल मारिया विल्लार से बात करेंगे। हालांकि, उनका फैसला क्या होना चाहिए, इसके बारे में स्पेनिश मीडिया एकमत है।
स्पेन को मिली हार के बाद अब इस बात की चर्चा नहीं है कि 65 वर्षीय कोच को टीम में बने रहना चाहिए या नहीं? चर्चा इस बात पर हो रही है कि नया कोच कौन होगा।
एक कोच के रूप में बोस्क की सबसे बड़ी खासियत उनका खिलाड़ियों के साथ विनम्र व्यवहार और टीम में सौहार्द बनाते हुए खिलाड़ियों को क्लबों की प्रतिस्पर्धा से दूर रख राष्ट्रीय टीम का अहसास देना था। लेकिन, स्पेन के गौरव को बनाए रखने वाले खिलाड़ियों की पीढ़ी अब पुरानी और कमजोर हो रही है।
सर्गियो रामोस, डेविड सिल्वा जैसे खिलाड़ी अब 30 की उम्र में हैं और कई खिलाड़ियों जैसे इकेर कासिलास इस टूर्नामेंट में स्थापन खिलाड़ी थे। कोच ने यूरो 2016 में कुछ नए खिलाड़ी आजमाए लेकिन कुल मिलाकर उनके परंपरावादी रूप ने उनका साथ नहीं छोड़ा और यूरो 2016 में टीम उस टीम से थोड़ा ही अलग दिखी जिसे ब्राजील में हार नसीब हुई थी।
सबसे बड़ी परेशानी यह है कि बोस्क के बाद किसके हाथों में स्पेन की टीम की कमान होनी चाहिए? इसमें पेप गार्डियोला और एरनेस्तो वालवेर्दे का नाम आता है। वालवेर्दे पहले से ही किसी और टीम का नेतृत्व कर रहे हैं जबकि गार्डियोला कैटालान की स्पेन से आजादी के समर्थन में जिस तरह भावना जता चुके हैं, उसे देखते हुए उन्हें स्पेन के कोच का पद मिलना मुश्किल लगता है।
इसके साथ ही कई ऐसे नाम है, जिनके स्पेन के कोच पद पर विराजमान होने की अटकलें लगाई जा रही हैं। इसमें जोआक्विन कापारोस का नाम भी शामिल है। कापारोस की तकनीक डेल बोस्क से काफी अलग तरह की है। बोस्क का जाना कई मायने में स्पेन के एक युग के समापन जैसा होगा।
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