यौन दुर्व्यवहार पर भारतीय शांतिरक्षकों को मिली क्लीन चिट

अरुल लुइस

अरुल लुइस

संयुक्त राष्ट्र, 5 मार्च (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र ने शांतिरक्षकों द्वारा यौन दुर्व्यवहार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की प्रतिबद्धता जताई है, लेकिन भारतीय शांतिरक्षकों को वर्ष 2015 के लिए इस मामले में क्लीन चिट मिली है।

पिछले साल शांतिदूतों के खिलाफ दर्ज यौन दुर्व्यवहार के कुल 69 मामलों को ‘घृणास्पद’ बताते हुए अवर महासचिव अतुल खरे ने शुक्रवार को संवाददाताओं को बताया “हम कभी भी रक्षकों को भक्षक नहीं बनने देंगे।”

दर्ज किए गए मामलों में 22 मामले नाबालिगों से संबंधित थे। खरे ने कहा कि एक 13 वर्षीय लड़की की खबर पढ़कर वह ‘व्यक्तिगत तौर’ पर दुखी हुए थे जो एक शांतिरक्षक द्वारा दुष्कर्म का शिकार होने के कारण गर्भवती हो गई थी।

उन्होंने कहा, “इस प्रकार का मामला देखकर मुझे खुद को शांतिरक्षक कहलाने पर शर्म महसूस होती है।”

रिपोर्ट के मुताबिक, “संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून द्वारा तैयार एक रिपोर्ट में 2015 के दौरान संयुक्त राष्ट्र की सभी इकाइयों में यौन दुर्व्यवहार के 99 आरोपों में से एक संयुक्त राष्ट्र की लिंग समानता और महिला सशक्तीकरण इकाई से संबंधित थी। वह आरोप निराधार था।”

संयुक्त राष्ट्र ने पहली बार उन शांति रक्षकों की राष्ट्रीयता की पहचान की है जिनके खिलाफ शिकायत मिली है और इसमें 7,798 भारतीय शांतिरक्षकों में से किसी पर यह आरोप नहीं लगा है।

वर्ष 2014 की ऐसी ही एक रिपोर्ट में 51 आरोपियों की राष्ट्रीयता की पहचान नहीं की गई थी। लेकिन ‘ऑफिस ऑफ इंटरनल ओवरसाइट सर्विसिज’ की एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार भारतीय शांति रक्षकों द्वारा 2010 और 2013 में यौन दुर्व्यवहार के तीन मामलों की पुष्टि हुई थी।

भारत ने स्पष्ट किया है वह अपने शांतिरक्षकों द्वारा यौन दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं करेगा।

पिछले साल और इस साल शांतिरक्षा अभियानों में ऐसी खबरों की बाढ़ आने के बाद भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने पिछले महीने शांति अभियानों की विशेष समिति को कहा था, “एसइए (यौन शोषण और दुरुपयोग) पर हमारी ‘शून्य सहनशक्ति’ है और हम चाहते हैं कि ऐसे मामलों में संयुक्त राष्ट्र की शून्य सहनशक्ति हो।”

खरे ने कहा कि यौन शोषण के पीड़ितों के लिए एक न्यास निधि स्थापति की जा रही है और इसे पोषित करने का एक माध्यम आरोपियों का वेतन घटाना है।

यौन दुर्व्यवहार और शोषण रोकने के उपायों को रेखांकित करते हुए बान की मून ने कहा, “संयुक्त राष्ट्र कर्मियों द्वारा ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए प्रभावशाली उपाय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।”

उन्होंने सभी देशों से आरोपियों पर शीघ्रता से मुकदमा चलाने और जरूरत पड़ने पर कानूनों में बदलाव करने को कहा।

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