मेले में पहली बार महिला पहलवानों ने कुश्तियों में रोमांच पैदा कर दिया। जबकि दंगल का असली रोमांच जनता को तब देखने मिला जब एक ओलंपिक पदक विजेता महिला पहलवान की एक युवा पहलवान से पहली बार अखाड़े में कुश्ती हुई। दंगल रात करीब ढाई बजे तक चला जिसमें आखिरी कुश्ती दो लाख रुपये इनाम की बराबरी पर छूटी।
रियो ओलंपिक में कुश्ती में कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक ने कहा कि मेरा मन यहां की जनता के प्यार व उत्साह को देखकर गदगद हो गया है और दाऊ बाबा रेवती मईया की कृपा हुई तो वह हाथरस फिर से आएंगी।
साक्षी मलिक ने कहा कि वह दंगल संयोजक अतुल अग्रवाल व विधायक देवेन्द्र अग्रवाल व उनकी पूरी टीम द्वारा उनके किए गए नागरिक अभिनंदन से बेहद गदगद हैं जिसे वह कभी भुला नहीं पाएंगी। उन्होंने पुलिस प्रशासन व जिला प्रशासन का बेहतरीन व्यवस्था के लिए आभार प्रकट किया और कहा कि दाऊ बाबा की कृपा रही और मौका मिला तो मैं हाथरस दोबारा आने की कोशिश करूंगी।
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