लापता पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता घर लौटा (लीड-1)

इस्लामाबाद, 28 जनवरी (आईएएनएस)। इस माह के शुरू में इस्लामाबाद से लापता पाकिस्तान के शिक्षाविद् और मानवाधिकार कार्यकर्ता सलमान हैदर सकुशल घर लौट आए हैं। वह स्वस्थ और सुरक्षित हैं। इस बात की पुष्टि उनके भाई जीशान हैदर ने समाचार पत्र डॉन से की है।

उन्होंने हालांकि आगे विस्तार से जानकारी नहीं दी।

फातिमा जिन्ना विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैदर गत छह फरवरी को लापता हो गए थे। इसके बाद उनकी पत्नी ने लोही भेर पुलिस थाने में एक रपट दर्ज कराई थी। पुलिस ने प्रोफेसर की कार कोरल चौक से बरामद की थी, लेकिन उनके बारे में कोई भी जानकारी नहीं मिली थी।

गत छह जनवरी को हैदर इस्लामाबाद से लापता हो गए थे। उनके गायब होने के बाद उनकी सुरक्षित वापसी के लिए एक ऑनलाइन अभियान शुरू हुआ था। वह धार्मिक अतिवाद और पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा विपक्षी कार्यकर्ताओं के दुरुपयोग के खिलाफ मुखर रहे हैं।

पहले सोशल मीडिया कार्यकर्ता वकास गोराया और असीम सईद लाहौर से गत चार जनवरी को गायब हुए थे। अहमद रजा नसीर शेखपुरा से सात जनवरी को लापता हुए थे, जबकि सलमान हैदर इस्लामाबाद से छह जनवरी को लापता हुए थे।

लापता अन्य ब्लॉगर पाकिस्तान में संगठित धर्म, मौलानाओं के रसूख और देश की शक्तिशाली सेना का सोशल मीडिया पर आलोचना करते रहे हैं।

हैदर जब छह जनवरी की रात घर नहीं लौटे तो उनके लापता होने की खबर सामने आई। उसी रात उनकी पत्नी को हैदर के फोन से संदेश मिला था, जिसमें उनकी कार की जगह बताई गई थी और उसे बरामद किए जाने की भी जगह बताई गई थी।

पुलिस ने कहा कि प्रोफेसर के भाई जीशान की शिकायत पर एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

साल 2014 में जब सांप्रदायिक हत्याएं चरम पर थीं तब हैदर ने ‘काफिर’ शीर्षक से एक कविता लिखी थी जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई थी। कविता में देश में व्याप्त असहिष्णुता की निंदा की गई थी और उसकी काफी प्रशंसा हुई थी।

प्रोफेसर के गायब होने के बाद उनकी सुरक्षित वापसी की मांग करते हुए पाकिस्तानी शहरों में सैकड़ों लोगों ने प्रदर्शन किया। परिजनों और अधिकार संगठनों का आरोप है कि बड़े पैमाने पर विरोधियों पर प्रहार के हिस्सा के रूप में ब्लॉगर को गायब करने के पीछे शक्तिशाली इंटर सर्विसिस इंटेलिजेंस एजेंसी का हाथ था।

किसी भी संगठन ने हैदर के अपहरण की जिम्मेदारी नहीं ली थी।

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