टोरंटो, 17 जनवरी (आईएएनएस)। कनाडा आखिरकार टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के लिए रकम जुटाने वाले एक पूर्व तमिल टाइगर को वापस श्रीलंका भेजने के लिए तैयार हो गया है।
मनीकावासगम सुरेश को लिट्टे ने 1990 को श्रीलंकाई तमिल प्रवासियों से धन जुटाने के लिए विश्व तमिल आंदोलन के समन्वयक के रूप में कनाडा भेजा था।
कनाडा की संघीय अदालत ने सुरेश के निर्वासन को कनाडा द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन का सदस्य रहने के कारण बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि वह मानवता के खिलाफ किए गए अपराधों में लिप्त रहा है।
तमिल टाइगर्स ने वल्र्ड तमिल मूवमेंट के साथ 1990 के दशक में कनाडा में धन जुटाने का काम किया था। धन जुटाने के लिए चलाए जाने वाले अभियानों को कई बार जबरन वसूली के तौर पर देखा गया था।
सुरेश्ी को 1995 को गिरफ्तार कर श्रीलंका भेजने का आदेश दिया गया था। लेकिन कनाडा के सर्वोच्च न्यायालय ने इस पर रोक लगा दी।
2008 में जब कनाडा ने लिट्टे पर एक आतंकवादी संगठन के तौर पर प्रतिबंध लगा दिया तो इमिग्रेशन एंड रिफ्यूजी बोर्ड ऑफ कनाडा ने सुरेश को आतंकवादी संगठन के सदस्य होने के कारण अस्वीकार्य करार देते हुए 2015 में देश से निकालने का आदेश दिया।
सुरेश ने इसके खिलाफ संघीय अदालत में अपील दायर की लेकिन अदालत ने इसे वापस श्रीलंका भेजने के इमिग्रेशन एंड रिफ्यूजी बोर्ड ऑफ कनाडा के फैसले को बरकरार रखा है।
सुरेश 2009 में जातीय संघर्ष की समाप्ति के बाद श्रीलंका भेजा जाने वाला पहला हाई प्रोफाइल पूर्व तमिल टाइगर होगा।
बड़ी संख्या में बसे होने के कारण कनाडा श्रीलंका तमिल प्रवासियों का घर माना जाता है।
dharmpath.com dharmpath