वयस्कों में ‘स्लीप एपनिया’ से बढ़ सकती है जिगर की बीमारी

लंदन, 8 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय मूल के शोधकर्ता ने एक नए अध्ययन में बताया है कि प्रतिरोधी स्लीप एपनिया (ओएसए) और कम आक्सीजन की रात में मात्रा वयस्कों में होने वाले गैर-अल्कोहल वाले वसा अम्ल (एनएएफएलडी) की जिगर से जुड़ी बीमारी के लिए जिम्मेदार हैं।

पत्रिका ‘हिपेटोलॉजी’ में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, प्रतिरोधक स्लीप एपनिया और रात में कम ऑक्सीजन की वजह से एनएएफएलडी का स्राव बढ़ जाता है, जिससे गैर-अल्कोहल वाले स्टियोहिपेटिटिस (एनएएसएच) एक प्रकार का वसा जिगर का रोग, जिसमें जिगर में वसा संचय हो जाने पर संक्रमित हो जाता है।

ऐसे व्यक्ति जो शराब कम पीते हैं या नहीं पीते हैं, उनकी जिगर कोशिकाओं में अतिरिक्त वसा के संचय की वजह से गैर-अल्कोहल वाली वसा की बीमारियां (एनएएफएलडी) होती हैं।

हालांकि अलग यकृत स्टिीटोसिस को एनएएफएलडी से कम खतरनाक माना जाता है। एनएएसएच वाले मरीज आगे चल कर वयस्कों में हिपेटोसेलुलर कार्सिनोमा गंभीर फाइब्रोसिस और सिरोसिस का शिकार हो जाते हैं।

अमेरिका के कॉलोराडो स्कूल ऑफ मेडिसीन की शोधकर्ता शिखा सुंदरम ने कहा, “यहां प्रारंभिक तथ्य है कि मोटापा से जुड़े प्रतिरोधक स्लीप एपनिया (ओएसए) और आपस में जुड़े रात वाले हाइपोक्सिया एक दूसरे से एनएएफएलडी के विकास से जुड़े होते हैं। बालकों में ज्यादा विकसित जिगर की बीमारी ओएसए या हाइपोक्सिया देखी जाती है और यह फाइब्रोसिस एनएएसएच के विकास में भूमिका निभाती है।”

शोधकर्ताओं ने 36 एनएएफएलडी वाले किशोरों पर इसका अध्ययन किया है, जिसमें 14 दुबले लोग रहे, ऑक्सीकरण तनाव को समझने के लिए प्रतिरोधक स्लीप एपनिया को शुरू कराया गया और कम आक्सीजन की मात्रा दी गई, जिससे बाल चिकित्सा के एनएएफएलडी को समझा जा सके।

सुदंरम ने कहा, “ये आकड़े दिखाते हैं कि निद्रा में श्वसन में विकृति से ऑक्सीकरण तनाव में इजाफा होता, जिससे बाल एनएएफएलडी से एनएएसएच की तरफ बढ़ता है। हम देखते हैं कि मोटापे वाले लोगों में एनएएफएलडी के साथ कम ऑक्सीजन की वजह से जिगर वाले ऊत्तकों पर निशान दिखने लगते हैं।”

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