द्वितीय विश्वयुद्ध में चीन ने जापानी आक्रमणकारियों से मुकाबला करने में अहम योगदान दिया है, चीन ने इस युद्ध में जीत सुनिश्चित करने में बलिदान भी दिया है। चीन में फासीवाद के खिलाफ युद्ध सबसे पहले शुरू हुआ और सबसे लंबे समय तक चला। 19 सितंबर 1931 में जापानी सेना ने पूर्वोत्तर चीन में हमला किया। 1937 में लोकप्रिय मार्को पोलो ब्रिज हादसा जापानी आक्रमण के खिलाफ चीन के लोगों के प्रतिरोध की शुरुआत थी।
आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि चीन में उस वक्त लगभग 18.6 लाख जापानी सैनिकों ने युद्ध किया, जो जापान की कुल सैनिकों की संख्या का 50 प्रतिशत था। युद्ध के अंत में संबंधित सैन्यबलों ने लगभग 19.5 लाख जापानी सैनिकों को या तो मार गिराया या घायल कर दिया।
जापानी आक्रमणकारियों को हराने के लिए चीन ने निर्णायक भूमिका निभाई, लेकिन वैश्विक स्तर पर चीन के योगदान को कम ही आंका गया है। दशकों तक जब पश्चिमी देशों के लोग द्वितीय विश्वयुद्ध के बारे में बात करते थे तो वे आमतौर पर यूरोपीय महाद्वीप पर लड़े गए युद्धों का उल्लेख करते थे।
उन्हें द्वितीय विश्वयुद्ध में चीन की भूमिका और उसके योगदान के बारे में कम ही जानकारी थी। यहां तक कि इतिहास की कई पुस्तकों में भी चीन के प्रयासों और उसके योगदान की अवहेलना की गई।
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