नई दिल्ली, 6 दिसम्बर (आईएएनएस)। इन दिनों राजधानी दिल्ली में चल रहे भारत-अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान मेले (आईआईएसएफ) में आम दर्शकों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। यह विज्ञान-प्रौद्योगिकी और औद्योगिक मेला चार से शुरू होकर आठ दिसंबर तक चलेगा।
इस विज्ञान मेले में विभिन्न तरह के स्टॉल लगाए गए हैं, इनमें से एक स्टॉल पर एक ग्लास के फलक पर दो कैरम स्ट्राइकर रखे हैं। ग्लास के फलक का किनारा थोड़ा ऊपर उठा है। आपको उनमें से एक स्ट्राइकर को अंगुली से झटका देना है। यह ग्लास के किनारे से टकराकर वापस आकर दूसरे स्ट्राइकर पर स्ट्राइक करेगा। यह एक मजेदार पहेलीनुमा प्रयोग है, लेकिन इस प्रणाली में शामिल डायनेमिक्स के लिए कई एप्लीकेशन का इस्तेमाल किया गया है।
राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद (एनसीएसएम) के शिक्षा सहायक राकेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि दरअसल स्ट्राइकर्स एलिप्टिक बोर्ड के केन्द्र बिंदु पर स्थित होते हैं जिसके कारण यह ट्रिक काम करता है। उन्होंने कहा, “मिसाइल को सटीक लक्ष्य करने के लिए इसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। टेलीविजन सेट के लिए डिश और एंटीना के द्वारा सिग्नल पकड़ने के लिए भी इसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।”
इस मेले का एक अन्य उद्देश्य विज्ञान से संबंधित सदियों पुरानी परिसम्पतियांे की रक्षा करना भी है। उदाहरण के लिए, केरल के राजीव गांधी जैव प्रौद्योगिकी केंद्र (आरजीसीबी) के द्वारा लगाए गए स्टॉल में दक्षिणी राज्य की पारंपरिक धान की 300 से अधिक किस्मों को प्रदर्शित किया गया ।
आरजीसीबी के निदेशक प्रोफेसर एम राधाकृष्ण पिल्लई ने कहा, “हमने पिछले एक दशक में इन्हें इकट्ठा किया है। इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि हमारे पास इन सभी चावल के बीजों का एक जीनोम बैंक है। आरजीसीबी के वरिष्ठ प्रबंधक (तकनीकी सेवाएं) जॉर्ज वर्गीज कहते हैं, “पारंपरिक किस्म के चावल के बीजों की तलाश में कोई भी किसान हमसे संपर्क कर सकता है। यह हमेशा हमारे पास रहेगा।”
आयुष (आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी को बढ़ावा देने वाला मंत्रालय) मंत्रालय के स्टॉल में पर्चे में विभिन्न रोगों के लिए पारंपरिक भारतीय इलाज की बात कही गयी है। भारत के सबसे बड़े विज्ञान आंदोलन के प्रणेता और विश्व आयुर्वेद कांग्रेस के आयोजनकर्ता विज्ञान भारती के महासचिव ए. जयकुमार कहते हैं, “देर से ही सही, लेकिन यह प्रणालियां हमारे औषधीय विकल्पों में एक मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। वे वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रासंगिक हैं।”
100,000 वर्ग फुट में फैले क्षेत्र में लगाये गये करीब 240 स्टॉल भीड़ को आकर्षित कर रहे हैं। दर्शक रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और नेशनल थर्मल पावर के स्टॉलों का भी दौरा कर रहे हैं।
विज्ञान भारती और टेक्नोलॉजी इनफार्मेशन फोरकस्टिंग एंड असेसमेंट काउंसिल (टीआईएफएसी) के सहयोग से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान के केन्द्रीय मंत्रालयों द्वारा आईआईटी दिल्ली में आयोजित इस मेले का उद्देश्य विज्ञान को आम लोगों के लिए उपलब्ध कराना है।
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