मथुरा/वृंदावन, 16 नवंबर – उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के वृंदावन क्षेत्र में रविवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने परम्परागत ढंग से अनंत शेष स्थापना पूजा करके चंद्रोदय मंदिर की आधारशिला रखी। यह मंदिर 700 फुट ऊंचा होगा। निर्माण के बाद यह विश्व का सबसे ऊंचा मंदिर होगा। मंदिर का गर्भगृह जमीन से करीब 15 मीटर ऊंचा है। इस दौरान राष्ट्रपति ने कहा कि विश्व के सबसे ऊंचे मंदिर के गर्भगृह का शिलान्यास करना उनके लिए सम्मान और गौरव की बात है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की पवित्र धरती पर आकर वह बेहद खुश हैं। चंद्रोदय मंदिर के गर्भगृह का शिलान्यास करना उनके लिए गर्व की बात है। वृंदावन में आध्यात्मिक केंद्र बनेगा। साथ ही पांच हजार साल पुराना कृष्ण के जमाने का वैभव भी लौटेगा।।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत विकासशील से आगे बढ़कर अब विकासित राष्ट्र बनने की राह पर है। इस परिस्थिति में देशवासियों और खासकर युवाओं पर सामाजिक व आर्थिक दबाव बढ़ेंगे। ऐसे में आध्यात्मिकता की ज्यादा जरूरत होगी।
मंदिर की आधारशिला रखने के बाद प्रणब बांके बिहारी मंदिर में दर्शन करने गए, जहां उन्होंने करीब 20 मिनट तक पूजा-अर्चना की। इसके बाद हेलिकॉप्टर से दिल्ली वापस लौट गए।
इस मौके पर राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि उ.प्र. में ताजमहल के बाद यह मंदिर भी पर्यटन क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान रखेगा। उन्होंने इस भव्य मंदिर के समय पर पूरा होने के लिए मंगल कामनाएं की।
चन्द्रोदय मंदिर के चेयरमैन मधु पंडित दास ने कहा कि यह केवल एक मंदिर नहीं बल्कि आधुनिक संदर्भ में भगवत गीता तथा श्रीमद् भागवतम के संदेश को मन में बिठाने का ऐसा प्रभावशाली मंच है जो देश के युवाओं को नैतिक व आचार संबंधी ढांचे को प्रभावित करने में मदद करेगा।
चन्द्रोदय मंदिर के अध्यक्ष ने कहा कि यह मंदिर श्रीकृष्ण तथा वृन्दावन के सभी श्रद्धालुओं के लिए महत्वाकांक्षी परियोजना है। यह मंदिर भारत के युवाओं को बेहतरीन चरित्र तथा जीवन के पवित्र मूल्यों वाला जिम्मेदार नागरिक बनने में प्रमुख भूमिका अदा करेगा।
इसके पूर्व राज्यपाल राम नाइक, सांसद हेमा मालिनी और उप्र के कारागार मंत्री बलराम यादव ने राष्ट्रपति का स्वागत किया। इस दौरान ऑस्कर फर्नांडिस सहित कई विशिष्ट लोग मौजूद रहे। मथुरा प्रशासन ने इन लोगों की सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए थे।
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