टोरंटो, 3 दिसम्बर (आईएएनएस)। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के एक समूह ने पहली बार सुदूर अंतरिक्ष से आने वाली बेहद ऊर्जावान रहस्यमयी तेज रेडियो तरंगों को विधिवत रिकॉर्ड किया।
650 घंटों से अधिक के अभिलेखीय डाटा का विश्लेषण करने के बाद वैज्ञानिकों को पहली बार अंतरिक्ष के बाहरी हिस्से से इन रहस्यमयी रेडियो तरंगों के पुख्ता सबूत मिले।
शोध से मिले तथ्यों से पता चलता है कि ये रहस्यमयी रेडियो तरंगें अंतरिक्ष के अत्यधिक चुंबकीय आवेश वाले क्षेत्र से उत्पन्न हुई हैं, जो संभवत: हाल ही में हुए सुपरनोवा (तारों में होने वाला सबसे बड़ा विस्फोट) या किसी सक्रिय नेबुला के कारण उत्पन्न हुआ।
इन बेहद ऊर्जावान रेडियो तरंगों का करीब एक दशक पहले पता लगा और ये बेहद क्षणिक होती हैं।
अब तक वैज्ञानिक इस तरह की सिर्फ 16 रेडियो तरंगें रिकॉर्ड कर पाए हैं, हालांकि उनका मानना है कि अंतरिक्ष में प्रतिदिन हजारों रेडियो तरंगे उत्सर्जित होती रहती हैं।
कनाडा की ब्रिटिश कोलंबिया युनिवर्सिटी के खगोलविज्ञानी कियोशी मासुई के अनुसार, “हम अब यह जान गए हैं कि इस विशेष विस्फोट से उत्पन्न हुई ऊर्जा बेहद सघन चुंबकीय क्षेत्र से होकर गुजरती है।”
मासुई और डरबन स्थित क्वाजुलू नटाल विश्वविद्यालय के जोनाथन सीवर्स द्वारा तैयार एक सॉफ्टवेयर के जरिए इन रेडियो तरंगों को रिकॉर्ड किया गया।
सॉफ्टवेयर के जरिए कुल 40 टेराबाइट डाटा एकत्रित किया गया है, जिसका विश्लेषण अपने आप में एक चुनौती है।
वैज्ञानिक के अनुसार, “इन विशाल आंकड़ों में से हमने कुछ अनोखे संकेतों का पता लगाया है जो अब तक ज्ञात रेडियो तरंगों के लक्षणों से मेल खाते हैं।”
इन संकेतों के अध्ययन से यह भी पता चलता है कि ये रेडियो तरंगें पृथ्वी तक पहुंचने से पहले दो भिन्न आयनीकृत गैस क्षेत्रों से गुजरी हैं।
मासुई के अनुसार इन विशाल आंकड़ों के जरिए रेडियो तरंगों के बारे में अब तक ज्ञान जानकारी से कहीं अधिक मालुमात हासिल किए जा सकते हैं और इन रहस्यमयी अंतरिक्ष घटनाओं के बारे में अहम सुराग हासिल किया जा सकता है।
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