भोपाल, 26 जुलाई (आईएएनएस)। कहा जाता है कि ‘राजनीति में हमलावर होना ही सुरक्षा का सबसे बड़ा हथियार है’। मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी ऐसा ही कुछ मानकर चल रही है, यही कारण है कि व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) घोटाले में अपनों पर हो रहे हमलों का जवाब देने के लिए भाजपा ने विरोधी दल कांग्रेस के नेताओं पर सीधे हमले शुरू कर दिए हैं।
भोपाल, 26 जुलाई (आईएएनएस)। कहा जाता है कि ‘राजनीति में हमलावर होना ही सुरक्षा का सबसे बड़ा हथियार है’। मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी ऐसा ही कुछ मानकर चल रही है, यही कारण है कि व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) घोटाले में अपनों पर हो रहे हमलों का जवाब देने के लिए भाजपा ने विरोधी दल कांग्रेस के नेताओं पर सीधे हमले शुरू कर दिए हैं।
राज्य की सियासत में व्यापमं घोटाला एक बड़ा मुद्दा बन गया है। इस मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय द्वारा केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को जांच सौंपी गई है। सीबीआई की जांच पूरी रफ्तार से चल रही है। अब तक 14 प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है।
सीबीआई ने अब तक जो प्राथमिकी दर्ज की है, उनमें आए नामों ने सत्तारूढ़ दल भाजपा की मुसीबतें बढ़ा दी हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि इन प्राथमिकी में भाजपा के सदस्य और पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य (राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त) रहे गुलाब सिंह किरार, डॉ. बी.आर. श्रीवास्तव, सुधीर सिंह के नाम आ चुके है। इनका सीधे तौर पर भाजपा के किसी न किसी नेता से जुड़ाव रहा है।
व्यापमं के मुद्दे को लेकर कांग्रेस हमलावर है और मामला सीबीआई को सौंपे जाने से उत्साहित भी। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी मोहन प्रकाश तो यहां तक कह चुके हैं कि “इस घोटाले के सीधे तार मुख्यमंत्री निवास से जुड़े हुए हैं। पार्टी और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े कई लोगों को यह डर सताए जा रहा है कि सीबीआई जांच में कहीं उनका नाम आ जाए।”
वहीं कांग्रेस ने मुख्यमंत्री चौहान के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़क से विधानसभा तक में हंगामा किया, जिसके चलते 12 दिन चलने वाला विधानसभा का मानसून सत्र तीन दिनों में ही खत्म हो गया।
कांग्रेस के हमलों का जवाब देने के लिए भाजपा ने भी तीखे तेवर अपनाए हैं। पार्टी के महामंत्री अरविंद भदौरिया ने अपने चिरपरिचित प्रतिद्वंद्वी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे पर सीधा हमला बोला है। उनका आरोप है कि कटारे की संपत्ति में दस वर्षो में एक हजार प्रतिशत का इजाफा हुआ है। इतना ही नहीं, उन्होंने एक नहीं तीन पैनकार्ड बनवाए हैं। यह अपराध है और इसकी शिकायत उन्होंने थाने में की है।
एक तरफ जहां भाजपा ने कटारे पर हमला बोला है, वहीं 18 वर्ष पहले संदिग्ध परिस्थितियों में हुई कांग्रेस नेत्री सरला मिश्रा की मौत के मामले की सीबीआई जांच की मांग का समर्थन किया। सरला की दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में 1997 में जलकर मौत हुई थी। सरला के भाई आनंद मिश्रा ने सीबीआई जांच की मांग करते हुए बोर्ड ऑफिस चौराहे पर धरना भी दिया था।
भाजपा के आरोपों के जवाब में कटारे ने कहा, “व्यापमं घोटाले के कारण भाजपा बौखलाई हुई है, वह बदले की राजनीति कर रही है। भाजपा एक तरफ कांग्रेस काल में विधानसभा में हुई नियुक्तियों का मामला उठाती है तो दिग्विजय सिंह के काल में हुई सरला मिश्रा मामले को हवा दे रही है। वहीं उन पर आरोप लगाए जा रहे हैं, अगर भाजपा में साहस है तो वह सक्षम एजेंसी से जांच करा ले।”
राजनीति के जानकारों की मानें तो व्यापमं के मामले में भाजपा और खासकर मुख्यमंत्री चौहान की छवि पर आंच आई है। इतना ही नहीं, सीबीआई की जांच के आगे बढ़ने के साथ कई प्रभावशाली लोगों पर उंगली उठना तय है। लिहाजा, पार्टी के प्रदेश संगठन और सरकार को लग रहा है कि वह कांग्रेस पर हमला कर अपने को कुछ सुरक्षित कर लेगी अर्थात छवि को प्रभावित होने से कुछ बचा लेगी, जबकि वास्तविकता यह है कि अब काफी देर हो चुकी है।
ज्ञात हो कि राज्य में पीएमटी, पीईटी से लेकर कई अन्य व्यावसायिक परीक्षाएं और श्रेणी तीन व चार की भर्ती परीक्षाएं व्यापमं आयोजित करता है। इन परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी का खुलासा के बाद जांच एसटीफ ने की, आगे चलकर उच्च न्यायालय द्वारा गठित एसआईटी की निगरानी में एसटीएफ की जांच चली और अब सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर सीबीआई जांच कर रही है।
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