शिवकाशी आतिशबाजी उद्योग पर नया खतरा

चेन्नई, 18 अक्टूबर (आईएएनएस)| चीन से कथित तौर पर अवैध रूप से आयातित पटाखों ने तमिलनाडु के शिवकाशी में आतिशबाजी उद्योग को जहां पहले ही काफी नुकसान पहुंचाया है, वहीं अब धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप के कारण इस पर खतरे के नए बादल मंडराने लगे हैं।

तमिलनाडु फायरवर्क्‍स मैन्यूफैक्च र्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जी. अबिरुबन ने कहा कि जिला प्रशासन ने उन्हें आतिशबाजी के उत्पादन में धार्मिक भावनाओं का ख्याल रखने का निर्देश दिया है।

अबिरुबन ने आईएएनएस से कहा, “हमें जिला प्रशासन से एक पत्र मिला है, जिसमें हमें पटाखे बनाते समय लोगों की धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखने के लिए कहा गया है।”

हिंदू जनजागृति समिति की तमिलनाडु इकाई की संचालक उमा रविचंद्रन ने कहा, “दीवाली के दिन हम मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं और उनके चित्र वाले पटाखे भी फोड़ते हैं।”

रविचंद्रन ने कहा, “मां लक्ष्मी की तस्वीर टुकड़ों में फटती है और लोग उन पर पैर रखते हैं। यह ठीक नहीं है।”

उनकी बात के जवाब में अबिरुबन ने सवाल खड़ा किया कि उन अखबारों और विवाह निमंत्रणों का क्या होता है, जिनमें हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीरें होती हैं?

अबिरुबन ने कहा, “काम हो जाने के बाद हम उन्हें फेंक देते हैं या अन्य कार्यों के लिए प्रयोग में लाते हैं। यही बात देवी-देवताओं की तस्वीरों वाले पटाखों पर भी लागू होती है।”

अबिरुबन ने कहा कि ऐसी आतिशबाजी के उत्पादन और विक्रय की अनुमति के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का जिक्र करते हुए प्रशासन को जवाब भेज दिया गया है।

रविचंद्रन के मुताबिक, “आमतौर पर इस समय तक कारखाने तीन पारियों में काम करने लगते थे, लेकिन आर्डर के अभाव के कारण उत्पादन केवल तीन दिनों तक सीमित कर दिया गया है।”

अबिरुबन ने कहा, “दिवाली नजदीक आते ही चीन से अवैध रूप से आयातित पटाखों की बाढ़ के डर से व्यापारी ऑर्डर देने से पीछे हट रहे हैं।”

अबिरुबन के मुताबिक, शिवकाशी आतिशबाजी उद्योग का व्यापार लगभग 6,000 करोड़ का है, लेकिन अवैध रूप से चीन से आयातित पटाखों के कारण इस वर्ष इस पर 30 प्रतिशत का असर होने का अनुमान है।

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