इस संबंध में गुरुवार को जारी बयान के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख ने चिंता जताते हुए कहा है कि इसमें प्रवासियों तथा शरणार्थियों को मनमाने तरीके से हिरासत में लेने की बात कही है, जो चिंतनीय है।
उच्चायुक्त के अनुसार, समझौते में सभी शरणार्थियों को लौटाने का उद्देश्य रखा गया है, जबकि व्यक्तिगत आकलन की बात भी कही गई है। यह विरोधाभासी है। यह सामूहिक निष्कासन का मामला बन सकता है।
ईयू-तुर्की समझौते के मुताबिक, “शरण के लिए आवेदन नहीं करने वाले प्रवासी या जिनके आवेदन उचित निर्देशों के अनुरूप नहीं पाए जाते हैं, उन्हें वापस तुर्की भेज दिया जाएगा।”
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