रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब में अधिकांश महिलाएं परदे में पूरी तरह से ढकी हुई होती हैं। काले रंग के अबाया (एक तरह का बुर्का) में ही वे घर से निकलती हैं। इसी परिधान का इस्तेमाल आतंकी सुरक्षाकर्मियों से बचने के लिए कर रहे हैं। सुरक्षा संस्थाओं के आतंकी रोधी अभियान में संदिग्धों को पकड़े जाने से इस तथ्य का खुलासा हुआ। कुछ संगठनों ने आतंकवादी अभियानों के समन्वय के लिए महिलाओं की भर्तियां भी की हैं। यही नहीं, महिला के साथ होने से आतंकियों के लिए आवासीय इलाकों में घर किराए पर लेना आसान हो जाता है।
रूढ़िवादी सऊदी समाज में पुरुषों और महिलाओं को एक-दूसरे से घुलने-मिलने की मनाही है। ऐसे में पुलिस भी महिलाओं की आसानी से निगरानी नहीं कर पाती है और इसका फायदा आतंकी उठाते हैं।
समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब के दम्माम में मई 2015 में महिलाओं के परिधान में एक आत्मघाती हमलावर ने एक मस्जिद को निशाना बनाया था। रिपोर्ट में बताया गया है कि आतंकवादी-रोधी अभियानों में छापों के दौरान जब्त होने वाले सामानों में काले रंग का अबाया सबसे ऊपर रहा है।
गृह मंत्रालय के एक बयान से पहले ही इस बात की पुष्टि हो गई थी कि आतंकवादियों के लिए महिलाओं के परिधान अपनी पहचान छुपाने का एक प्रमुख हथियार बन गए हैं।
2016 के शुरुआती महीनों में गृह मंत्रालय ने एक सऊदी महिला की गिरफ्तारी की घोषणा की थी। यह महिला रियाद से सऊदी अरब के दक्षिण हिस्से में विस्फोटक बेल्ट तस्करी कर लेकर गई थी, जिसका इस्तेमाल असीर क्षेत्र की मस्जिद में विस्फोट के लिए किया गया था। इस विस्फोट में 15 पुलिककर्मी मारे गए थे।
सऊदी अरब आतंकवादी संगठनों, खासकर इस्लामिक स्टेट (आईएस) के खिलाफ काफी सालों से जंग कर रहा है और हाल के समय में वह इससे काफी प्रभावित भी हुआ है।
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