मक्का, 10 नवंबर (आईएएनएस)। सऊदी शासन ने पुलिस के एक सिपाही की हत्या करने वाले नागरिक को मृत्युदंड तामील कर दिया है। सिपाही उसे नशा व्यापार के आरोप में गिरफ्तार करने की कोशिश कर रहा था। आतंरिक मंत्रालय ने यह जानकारी दी है।
आंतरिक मंत्रालय के मुताबिक, आयद-अल-जहदाली को मक्का क्षेत्र में मुत्युदंड दे दिया गया।
सऊदी अरब में आमतौर पर मृत्युदंड में तलवार से सर कलम कर दिया जाता है, हालांकि कई बार फायरिंग दस्ते को भी तैनात किया जाता है।
खूनी निष्पादन की निंदा करते हुए एमनेस्टी इंटरनेशनल ने एक बयान में कहा कि सऊदी अरब में इस वर्ष 151 लोगों को मुत्युदंड दिया जा चुका है, जो कि 1995 से अब तक दर्ज अधिकतम आंकड़ा है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल के मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका कार्यक्रम के उपनिदेशक जेम्स लायंच के मुताबिक, “सऊदी अरब अधिकारी खूनी निष्पादन की होड़ जारी रखने पर आमादा दिखाई दे रहे हैं। इस होड़ में इस साल अब तक कम से कम 151 लोग मारे जा चुके हैं। यानी की औसतन हर दो दिनों में एक व्यक्ति को मारा जा रहा है।”
एमनेस्टी के मुताबिक, 151 मृत्युदंडों में से लगभग आधे ऐसे अपराधों के लिए दिए गए हैं जो कि ‘अत्यधिक गंभीर अपराधों’ के दायरे में नहीं आते, जिसके अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत मृत्यु दंड दिया जा सकता है।
संगठन के मुताबिक, सऊदी अरब में विदेशियों के लिए मृत्युदंड को विषमतापूर्वक इस्तेमाल किया जाता है और इस वर्ष नशा संबंधित आरोपों में 63 लोगों को दिए गए मृत्युदंड के मामलों में 45 विदेशी नागरिक थे।
एमनेस्टी ने कहा कि सऊदी अरब में 2015 में अब तक 71 विदेशी नागरिकों को मृत्युदंड दिया जा चुका है, जिनमें से अधिकांश विकासशील देशों के प्रवासी कामगार थे।
अधिकार विशेषज्ञों ने साम्राज्य में परीक्षणों की निष्पक्षता पर चिंता व्यक्त की है। इनमें प्रवासियों पर ज्यादा खतरा होता है, क्योंकि उन्हें अरबी भाषा नहीं आती और परीक्षण के दौरान उन्हें उपयुक्त अनुवादक भी नहीं दिया जाता।
जेम्स लायंच ने कहा, “मौत की सजा किसी भी परिस्थिति में घृणित है, लेकिन यह खासतौर पर चिंतनीय है कि सऊदी अरब प्रशासन एक व्यापक पैमाने पर अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कानून और मानकों का उल्लंघन करने के लिए इसका इस्तेमाल कर रहा है। सजा के लिए चलाए जाने वाले मुकदमे निहायत अनुचित और कई बार राजनीति से प्रेरित होते हैं।”
देश के सर्वोच्च न्यायालय ने सऊदी अरब की कुख्यात आतंकवाद रोधी अदालत में एक राजनीतिक और निहायत अनुचित परीक्षण के बाद एक प्रमुख शिया मुस्लिम धार्मिक नेता शेख निमर बकिर अल निमर की मौत की सजा को बरकरार रखा है।
एमनेस्टी के मुताबिक, निमर का भतीजा अली मोहम्मद बकिर अल निमर और दो अन्य युवा शिया कार्यकर्ता जिन्हें सरकार विरोधी रैलियों में भाग लेने के लिए किशोरावस्था में गिरफ्तार कर लिया गया था, उनके मृत्युदंड को भी बरकरार रखा गया था।
तीनों का दावा है कि उन पर अत्याचार किया गया और मुकदमे के दौरान उन्हें वकील की सेवा लेने की अनुमति भी नहीं दी गई।
dharmpath.com dharmpath