नई दिल्ली-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (10 मई) को सिकंदराबाद में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए देश के लोगों से कई अपीलें की थीं. इनमें से एक अपील एक साल तक सोना ख़रीदने से बचने की भी थी. पीएम की इस अपील के बाद सर्राफा बाज़ार में चिंता का माहौल है. उद्योग संगठन और व्यापारियों का कहना है कि इससे कारोबार और एक करोड़ों लोगों के रोज़गार पर असर पड़ सकता है.
पीएम मोदी ने देश से ऐसे समय में सोना न खरीदने की अपील की है, जब भारत के सोने के आयात में पहले ही भारी गिरावट आ चुकी है. विश्व के दूसरे सबसे बड़े सोने के उपभोक्ता भारत ने वित्त वर्ष 2026 में औसतन प्रति माह लगभग 60 टन सोने का आयात किया, जिसका मासिक मूल्य लगभग 6 अरब डॉलर था.
उल्लेखनीय है कि हाल के महीनों में आयात में काफ़ी गिरावट आई है. जनवरी 2026 में लगभग 100 टन तक पहुंचने के बाद, फरवरी में आयात गिरकर लगभग 65–66 टन और फिर मार्च में लगभग 20–22 टन रह गया.
इस उद्योग से जुड़े लोगों ने इस गिरावट का कारण सोने की ऊंची कीमतों के साथ ही इसके व्यापार में आ रही बाधाओं को भी बताया है.
कस्टम क्लीयरेंस में देरी, टैक्स से जुड़े नियमों को लेकर अनिश्चितता और अधिकृत आयात करने वाले बैंकों के लाइसेंस रिन्यूअल की प्रक्रिया ने इस पर नकारात्मक असर डाला है.
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