सांकेतिक भाषा में माहिर मादा गोरिल्ला कोको की मौत

न्यूयॉर्क, 22 जून (आईएएनएस)। मशहूर पत्रिका ‘नेशनल ज्योग्राफिक’ के कवर पेज पर नजर आ चुकी मादा गोरिल्ला कोको की कैलिफोर्निया में 46 साल की उम्र में मौत हो गई।

वह हाथ के जरिए 1,000 से ज्यादा सांकेतिक इशारों से वैज्ञानिकों के साथ बात कर सकती थी, उन्हें चिढ़ा सकती थी और यहां तक कि बहस भी कर सकती थी।

गोरिल्ला फाउंडेशन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कोको की मौत मंगलवार को नींद में हो जाने की बात कही गई। कोको का जन्म सैन फ्रांसिस्को के चिड़ियाघर में चार जुलाई 1971 को हुआ था।

गोरिल्ला फाउंडेशन ने कहा, “उसका प्रभाव गहरा रहा है और उसने हमें गोरिल्ला की भावनात्मक क्षमता के बारे में सिखाया और उनकी ज्ञान संबंधी क्षमताओं ने दुनिया को आकार देना जारी रखा है।”

अपने पूरे जीवन में अपनी क्षमताओं की वजह से कोको सुर्खियों में बनी रही। अमेरिकी सांकेतिक भाषा के माध्यम से इंसानों के साथ संवाद करना शुरू करने के बाद नेशनल ज्योग्राफिक पत्रिका ने उसे अपने कवर पेज पर जगह दी।

पत्रिका के इस कवर का प्रकाशन 1978 में हुआ था।

कोको ने अपने जीवन का अधिकांश समय गोरिल्ला फाउंडेशन में ही बिताया। 2001 में अमेरिकी अभिनेता रॉबिन विलियम्स के साथ उसकी मुलाकात को फिल्माया गया था।

कोको ने वैज्ञानिको को 2012 में उस समय हैरान कर दिया, जब उसने दिखाया कि वह रिकॉर्डर बजाना सीख सकती है।

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