वाशिंगटन, 25 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिकी संसद की खुफिया समिति के नेता गुप्त रूप से राष्ट्रपति बराक ओबामा पर इस बात के लिए दबाव डाल रहे हैं कि वह केंद्रीय खुफिया एजेंसी (सीआईए) को इस्लामिक स्टेट (आईएस) के नेताओं को चुन-चुनकर मारने की अनुमति दें।
अमेरिकी टीवी नेटवर्क एनबीसी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक ओबामा को सर्वदलीय याचिका भेजी गई है। इसमें 2013 में जारी किए गए इस दिशा-निर्देश पर पुनर्विचार के लिए कहा गया है जिसमें कहा गया है कि सीआईए के बजाए सेना को लक्ष्य बनाकर हमला करना चाहिए।
यह याचिका ब्रसेल्स हमले से पहले भेजी गई थी। एनबीसी ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा कि ओबामा इसे बदलना नहीं चाहते क्योंकि वह इस नीति को आतंकी सरगनाओं के खात्मे के लिए कारगर मानते हैं।
ओबामा ने अपने कार्यकाल की शुरुआत में पाकिस्तान और यमन में सीआईए को ड्रोन मिसाइल से अलकायदा के आतंकवादियों पर हमला करने की अनुमति दी थी।
लेकिन, 2013 में एक दिशा-निर्देश जारी कर कहा गया कि सीआईए ड्रोन का इस्तेमाल केवल खुफिया सूचनाएं एकत्र करने में कर सकती है।
एनबीसी के मुताबिक, ओबामा और अन्य लोगों का मानना है कि किसी आदमी को ढूंढकर उसे मारना सीआईए का काम नहीं है। उसका काम मुख्य रूप से जासूसी करना है और उसे इसी काम में अपने संसाधनों को लगाना चाहिए। उनका यह भी मानना है कि कानूनी और नीतिगत रूप से अगर किसी आतंकवादी को मारने की जरूरत है, तो यह काम सेना को ही करना चाहिए।
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