सीएएस ने कायम रखा रूसी एथलीटों पर प्रतिबंध

लुसाने (स्विट्जरलैंड), 21 जुलाई (आईएएनएस)। खेल पंचाट न्यायालय (सीएएस) ने गुरुवार को रूस ओलम्पिक समिति की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उसने ट्रैक एंड फील्ड के एथलीटों पर से अगले महीने रियो में होने वाले ओलम्पिक खेलों से प्रतिबंध हटाने की मांग की थी।

समाचार एजेंसी तास के मुताबिक, सीएएस ने एक बयान में कहा है, “सीएएस ने रूस ओलम्पिक समिति और 68 खिलाड़ियों की अपील को खारिज कर दिया है।”

इस फैसले के बाद ऊंची कूद की खिलाड़ी दारया क्लिशिना के अलावा रूस का कोई और खिलाड़ी आने वाले ओलम्पिक में हिस्सा नहीं ले पाएगा।

सीएएस के सचिव मैथ्यू रिब ने अदालत के फैसले के बाद कहा कि रूस ओलम्पिक समिति (आरओसी) के पास ब्राजील में होने वाले ओलम्पिक-2016 में अपनी राष्ट्रीय ट्रैक एंड फील्ड टीम भेजने का कोई अधिकार नहीं है।

महासचिव ने कहा कि आरओसी चाहे तो स्विट्जरलैंड के संघीय न्यायालय में फैसले के खिलाफ अपील कर सकता है।

अंतर्राष्ट्रीय ओलम्पिक समिति (आईओसी) का कार्यकारी बोर्ड 24 जुलाई को रूस के ओलम्पिक-2016 में हिस्सा लेने पर आखिरी फैसला लेगा।

आईओसी फैसला लेने से पहले सीएएस द्वारा गुरूवार को दिए गए फैसले को भी ध्यान में रखेगी।

आईओसी ने एक बयान में कहा, “आईओसी खेल पंचाट न्यायालय के फैसले को भी ध्यान में रखेगी। हमें अब पूरे मामले को देखना होगा और इसका विश्लेषण करना होगा।”

बयान में कहा गया है, “रूस के एथलिटों के ओलम्पिक में हिस्सा लेने का फैसला आने वाले दिनों में लिया जाएगा।”

आईएएएफ ने रियो ओलम्पिक में रूस के ट्रैक एंड फील्ड खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लगाने के फैसले की तारीफ की है।

आईएएएफ ने एक बयान में कहा, “अंतर्राष्ट्रीय एथलेटिक्स महा संघ (आईएएएफ) खेल पंचाट न्यायालय के फैसले से काफी खुश है और उसके फैसले को अपना समर्थन देती है।”

बयान में कहा गया है, “आज के फैसले ने खिलाड़ियों के सामने एक स्तर कायम किया है। सीएएस ने आईएएएफ के खेल को साफ रखने के नियम को उपयोग करने के अधिकार को सम्मानित किया है, ताकि खिलाड़ी साफ रहें और प्रतियोगिता की गरीमा और साख बनाए रखने का समर्थन भी किया है।”

अदालत के फैसले पर आईएएफ के अध्यक्ष सेबास्टियन कोए ने कहा, “हम इस बात के शुक्रगुजार हैं कि हमारी अपने नियमों और हमारे नियमों को बरकरार रखने की ताकत तथा डोपिंग रोधी नियमों का समर्थन किया गया है, लेकिन यह विजयी बयान देने का दिन नहीं है।”

कोए ने कहा, “रियो के बाद भी आईएएएफ की टास्कफोर्स रूस के साथ उसके खिलाड़ियों को साफ बनाए रखने के लिए काम करेगी ताकि उनकी महासंघ और टीम अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लौट सके और उसे सम्मान मिल सके।”

रूस के खेल मंत्री विताली मुतको ने इस फैसले को राजनीति से प्रेरित बताया है और उनका मानना है कि इस फैसले का कोई कानूनी आधार नहीं है।

मुतको ने तास से कहा, “मैं इस फैसले पर सिर्फ पछतावा कर सकता हूं। हम अब अपने अगले फैसले के बारे में सोचेंगे। मेरा मानना है कि यह फैसला एकतरफा और कहीं न कहीं राजनीति से प्रेरित है और इसका कोई कानूनी आधार नहीं है।”

आईएएएफ ने 17 जून को ऑल रशियन एथलेटिक्स महासंघ (एआरएएफ) को सभी अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने से प्रतिबंधित कर दिया था जिसमें ओलम्पिक-2016 भी शामिल था।

आईएएएफ के डोपिंग रोधी विभाग ने रूस के सभी खिलाड़ियों की अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने की अपील को भी खारिज कर दिया था जिसमें रियो डी जेनेरियो में होने वाले ओलम्पिक खेल भी शामिल हैं।

आरओसी और रूस के 68 अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों ने सीएएस में आईएएएफ के फैसले के खिलाफ अपील की थी।

रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के सचिव दिमित्रि पेसकोव ने कहा है कि क्रमलिन ने भी सीएएस के फैसले की आलोचना की है।

पेसकोवा ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, “हमारा मानना है कि सामूहिक जिम्मेदारी का सिद्धांत अपनाना काफी मुश्किल है। हम यहां ट्रैक एंड फील्ड के खिलाड़ियों की बात कर रहे हैं जो ओलम्पिक के लिए काफी मेहनत कर रहे ैहैं। जिनका डोपिंग से कोई लेना देना नहीं है। जिनका इन आरोपों से भी कोई लेना देना नहीं है। इनका परीक्षण विदेशी डोपिंग रोधी एजेंसियों ने किया है।”

उन्होंने कहा, “हम इस फैसले पर शोक व्यक्त कर सकते हैं। हमारी संबंधित एजेंसी हालात का जल्द ही विश्लेषण करेंगी।”

एआरएफ के अध्यक्ष दिमित्रि शाहल्यखातिन ने तास से कहा कि गुरूवार को आए फैसले के बाद रूस के खिलाड़ियों ने ओलम्पिक में हिस्सा लेने के सारे मौके खो दिए हैं।

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