यह सहायता यूएन हाई कमिश्नर फॉर रिफ्यूजी (यूएनएचसीआर), यूएन चिल्ड्रेन्स फंड (यूनिसेफ), वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (डब्ल्यूएफओ) तथा क्षेत्र में काम कर रहे ऑस्ट्रेलिया की गैर सरकारी संस्थाओं को दी जाएगी।
विशॉप ने कहा कि सरकार व विपक्ष दुनिया के सबसे बदतर मानवीय संकट से जूझ रहे लोगों की सहायता के लिए बाध्य है।
उन्होंने कहा, “ऑस्ट्रेलिया की सहायता से सीरियाई शरणार्थियों व क्षेत्र में उनके मेजबान समुदायों को महत्वपूर्ण संसाधनों जैसे खाना, आवास व सुरक्षा मुहैया कराने में मदद मिलेगी।”
उन्होंने कहा, “योगदान बढ़ने से दुनिया के सबसे बदतर मानवीय संकट से जूझ रहे लोगों को मदद मिलेगी।”
लगभग 1.3 करोड़ लोगों को तत्काल मानवीय सहायता की दरकार है। इसके अलावा, 46 लाख सीरियाई शरणार्थी पड़ोसी देशों में हैं। अनुमानित तौर पर इराक में एक करोड़ लोगों को भी इस साल मानवीय सहायता की दरकार है।
उन्होंने कहा, “मानवीय सहायता फंड में बढ़ोतरी के अलावा, ऑस्ट्रेलियाई सरकार 10 ऑस्ट्रेलिया नागरिक कोर विशेषज्ञों को लेबनान व जॉर्डन में तैनात करेगा, जो सीरियाई शरणार्थियों को शिक्षा, जल, सफाई, शिविर सुविधा, रसद व सुरक्षा मुहैया कराने में संयुक्त राष्ट्र व एनजीओ की मदद करेंगे।”
बिशॉप ने कहा कि सहायता राशि का एक छोटा सा हिस्सा इराक में काम कर रही संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों को दिया जाएगा, क्योंकि वे इस्लामिक स्टेट (आईएस) द्वारा बर्बाद किए गए समुदायों की मदद करने में लगे हैं।
ऑस्ट्रेलियाई सरकार आईएस से स्वतंत्र हुए क्षेत्रों को स्थिर करने के लिए संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) को 14 लाख डॉलर सहित अतिरिक्त 35 लाख डॉलर की राशि इराक को प्रदान करेगी।
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