‘स्कॉटलैंड अपनी आजादी के लिए दोबारा जनमत संग्रह करवाए’

एडिनबर्ग, 24 जून (आईएएनएस)। पूर्व मंत्रिमंडल प्रमुख और स्कॉटिश नेशनल पार्टी के नेता एलेक्स सालमोंड ने कहा कि उन्हें लगता है कि यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के अगले दो साल में निकलने से पहले स्कॉटलैंड को ब्रिटेन से अगल होने को लेकर दोबारा जनमत संग्रह करवाना चाहिए।

एडिनबर्ग, 24 जून (आईएएनएस)। पूर्व मंत्रिमंडल प्रमुख और स्कॉटिश नेशनल पार्टी के नेता एलेक्स सालमोंड ने कहा कि उन्हें लगता है कि यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के अगले दो साल में निकलने से पहले स्कॉटलैंड को ब्रिटेन से अगल होने को लेकर दोबारा जनमत संग्रह करवाना चाहिए।

ब्रिटेन में गुरुवार को ईयू से निकलने के पक्ष में 51.9 फीसदी लोगों ने और बने रहने के पक्ष में 48.1 फीसदी लोगों ने मतदान किया था।

सालमोंड ने ब्रेक्सिट मतदान पर शुक्रवार को कहा कि यूरोपीय संघ के पक्ष में स्कॉटलैंट में एक बड़े बहुमत के बावजूद यह स्कॉटलैंड की संवैधानिक स्थिति में एक भौतिक परिवर्तन है।

सालमोंड ने बीबीसी रेडियो-स्कॉटलैंड से कहा, “इस परिवर्तन ने स्कॉटिस स्वतंत्रता के समूचे संदर्भ को बदल दिया है।”

उन्होंने कहा कि उनके परवर्ती निकोल स्टरजेओन को अब अपने घोषणापत्र को लागू करना चाहिए और दूसरा जनमत संग्रह करवाना चाहिए, “2014 के बाद अब परिस्थितियों में एक महत्वपूर्ण और भौतिक बदलाव आया है। जैसे कि स्कॉटलैंड को हमारी इच्छा के खिलाफ यूरोपीय संघ से बाहर ले जाया जा रहा है।”

“मुझे काफी हद तक यकीन है कि निकोलिया अपने घोषणापत्र को लागू करना शुरू कर देंगे।”

उनके हस्तक्षेप का तात्पर्य है कि वे उम्मीद करते हैं कि स्टरजेओन तुरंत दोबारा स्कॉटलैंड के ब्रिटेन से अलग होने को लेकर जनमत संग्रह करवाएंगी।

वह तुरंत जनमत संग्रह को हिचक सकती हैं, क्योंकि हाल के ओपिनियम पोल में इसके पक्ष में ऐसा कोई स्पष्ट पर्याप्त समर्थन देखने को नहीं मिला है।

स्टरजेओन बाद में शुक्रवार को एडिनबर्ग में इस मामले में बयान दिया कि ईयू से निकलने पर ब्रिटेन की सरकार की होनेवाली चर्चा में स्कॉटलैंड की भी सीधी भूमिका मिलनी चाहिए।

मंत्रिमंडल प्रमुख ने इसके अलावा मांग की कि वेस्टमिटर को हॉलीरोड को दूसरे चरण के जनमत संग्रह के लिए कानूनी अधिकार देना चाहिए, अगर वह ऐसा चाहता है।

स्कॉटलैंड में 2014 में जनमत संग्रह करवाया था, जिसमें यह पूछा गया था कि क्या स्कॉटलैंड को स्वतंत्र देश बन जाना चाहिए?

इसके खिलाफ 55.3 फीसदी मतदाताओं ने मतदान किया, जबकि इसके समर्थन में 44.7 फीसदी मतदाता थे।

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